टिकटॉक की मदद में आए बिल गेट्स

कोरोना वायरस के संक्रमण, वैक्सीन की तैयारी, चीन की भूमिका, विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लुएचओ की भूमिका आदि को लेकर जितनी तरह की साजिश थ्योरी की चर्चा है उन सबमें कहीं न कहीं से बिल गेट्स और उनके फाउंडेशन का नाम आ जाता है। इस वजह से पिछले दिनों उनको सफाई भी देनी पड़ी थी। हालांकि चीन, डब्लुएचओ और बिल गेट्स को लेकर चल रही साजिश थ्योरी थम नहीं रही है। इस बीच खबर आ गई है कि बिल गेट्स की कंपनी माइक्रोसॉफ्ट मुश्किल में घिरे चाइनीज एप टिकटॉक को बचाने आगे आई है। माइक्रोसॉप्ट इस कंपनी के अमेरिकी ऑपरेशन को खरीदने जा रही है।

इस बारे में बिल गेट्स ने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की है। गेट्स के कहने पर ट्रंप इस बात के लिए राजी हो गए हैं कि वे अभी तुरंत टिकटॉप पर पाबंदी नहीं लगा रहे हैं। उन्होंने बिक्री की बातचीत के लिए कंपनी को 45 दिन का समय दिया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वे टिकटॉक पर तत्काल पाबंदी लगाएंगे। लेकिन गेट्स ने कंपनी को बचा लिया। सवाल है कि चीन के खिलाफ इतना भारी माहौल बना है और दुनिया के देशों ने जब चीन को सबक सिखाने के लिए टिकटॉक को प्रतीकात्मक रूप से चुना है तो बिल गेट्स को उसे बचाने की इतनी बेचैनी क्यों है?

ध्यान रहे चीन को लेकर दुनिया भर के देशों में नाराजगी है। दुनिया भर के देशों की कंपनियां चीन से अपने ऑपरेशन बंद कर रही हैं। ऐसे में चीन की उस कंपनी को बचाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट क्यों आगे आई, जिससे सारे देश अपने यहां राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बता रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि चीन के और डब्लुएचओ को एक्सपोज होने से बिल गेट्स को भी कुछ राज खुलने का खतरा सता रहा है और इस दबाव में उनकी कंपनी टिकटॉक को बचा रही है?

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