अब जेडीएयू, अकाली ने भी दिखाए तेवर

ऐसा लग रहा है कि भाजपा की सभी सहयोगी पार्टियों ने एक साथ ही भाजपा को निशाना बनाने का फैसला कर लिया है। दो राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की सीटें क्या कम हुईं उसकी सहयोगी पार्टियों के तेवर तीखे हो गए। महाराष्ट्र में शिव सेना ने भाजपा से तालमेल खत्म कर लिया तो झारखंड में भी दो सहयोगी पार्टियों- आजसू और लोजपा ने तालमेल तोड़ कर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए। भाजपा किसी तरह से आजसू को मनाने में लगी है। रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा ने तो 50 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू भी अकेले चुनाव लड़ रही है।

अब जदयू और अकाली दल ने राष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर भाजपा को निशाना बनाया है। जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने महाराष्ट्र और झारखंड के घटनाक्रम को लेकर कहा है कि ऐसा लग रहा है कि गठबंधन में समग्रता की कमी हो गई है। गठबंधन की पार्टियों में एकजुटता और अपनापन घट गया है। लगभग ऐसी ही बात अकाली दल के नेता नरेश गुजराल ने भी कही है। असल में ये पार्टियां पहले से कहती रही हैं कि पहले की तरह एनडीए का एक ढांचा बनना चाहिए और सभी पार्टियों को उसमें बराबर भूमिका मिलनी चाहिए।

पर लगातार दूसरे लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से ज्यादा सीटें जीतने की वजह से भाजपा ने सहयोगी दलों की मांग की अनदेखी कर दी। उसने एनडीए का संयोजक, समन्वयक वगैरह बनाने के बारे में नहीं सोचा और न कभी एनडीए की बैठक बुलाने के बारे में सोचा गया। अब सहयोगी पार्टियों को लग रहा है कि महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के घटनाक्रम से भाजपा बैकफुट पर आई है तो वे अपनी पुरानी मांगों के साथ सामने आ गए हैं। हालांकि अब भी भाजपा इस पर ध्यान देगी इसकी संभावना कम है।

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