भाजपा के निशान पर सहयोगियों का लड़ना - Naya India
राजनीति| नया इंडिया|

भाजपा के निशान पर सहयोगियों का लड़ना

भारतीय जनता पार्टी ने सहयोगी पार्टियों के साथ तालमेल का एक नया फार्मूला बनाया है। इस फार्मूले के तहत सहयोगी पार्टियां भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ती हैं। दिल्ली में राजौरी गार्डेन की सीट खाली हुई तो भाजपा ने अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा को टिकट दिया पर वे भाजपा के निशान पर लड़े और भाजपा विधायक हैं। इसी तरह भाजपा ने महाराष्ट्र में 14 सीटें अपनी तीन छोटी सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ी हैं। खुद भाजपा 150 और शिव सेना 124 सीटों पर लड़ रहे हैं। पर भाजपा के नए फार्मूले के मुताबिक सहयोगी पार्टियों के 14 उम्मीदवार कमल निशान पर लड़ रहे हैं। यानी जीतेंगे तो वे भाजपा के विधायक होंगे।

ऐसे में उनके लिए पार्टी से अलग होना मुश्किल होगा। वे पार्टी से तभी अलग हो पाएंगे, जब विधानसभा से भी इस्तीफा दें। यह स्थिति भाजपा के लिए बहुत फायदे वाली है। सहयोगी पार्टियों के उम्मीदवारों को अपने निशान पर लड़ाने का एक फायदा तो यह है कि अब भाजपा 164 सीटों पर लड़ रही है और शिव सेना 124 पर। अगर सहयोगी पार्टियों के विधायक जीतते हैं तो वे भाजपा के विधायक कहे जाएंगे। उनसे भाजपा की संख्या बढ़ेगी। सरकार बनाने का दाव करने से लेकर अकेले सरकार बनाने तक के भाजपा के प्रयासों को इससे बड़ा फायदा होगा। तभी शिव सेना के नेता भी अपनी अलग गोटियां बैठा रहे हैं। सन 2000 में बाल ठाकरे को गिरफ्तार करने के फैसले को एनसीपी द्वारा आज गलत बताना अनायास नहीं है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *