BJP change names cities नाम बदलने की इतनी हड़बड़ी क्यों है?
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नाम बदलने की इतनी हड़बड़ी क्यों है?

भारतीय जनता पार्टी शहरों, स्टेशनों, जिलों आदि के नाम बदलने की बड़ी हड़बड़ी में है। पहले तो सिर्फ मुस्लिम नाम वाले जिलों, शहरों, स्टेशनों या सड़कों आदि के नाम बदले जा रहे थे लेकिन अब हिंदू धर्म से जुड़े नामों को भी बदलने की तैयारी हो रही है। इसका कारण समझ में नहीं आ रहा है। जैसे पिछले दिनों खबर आई कि भाजपा सरकार यमुना एक्सप्रेस वे का नाम बदल कर अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। पता नहीं किस वजह से यह प्रस्ताव रूक गया है लेकिन यह प्रस्ताव समझ से परे है। आखिर यमुना एक पवित्र नदी है और दिल्ली से दूर तक उत्तर प्रदेश को जोड़ती है। BJP change names cities

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बहरहाल, मध्य प्रदेश में इंदौर शहर का नाम बदलने के प्रस्ताव की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि भाजपा सरकार इसका नाम अहिल्याबाई होलकर के नाम पर रखना चाह रही है। हालांकि यह भी एक तथ्य है कि अहिल्याबाई ने इंदौर को अपनी राजधानी नहीं बनाया था, बल्कि वे अपनी राजधानी इंदौर से महेश्वर ले गई थीं। उससे पहले इस शहर का नाम इंद्रपुरी था, जहां मल्हारजी राव होलकर ने अपनी राजधानी बनाई थी। यह नाम इंद्रेश्वर महादेव के नाम पर पड़ा था। अहिल्याबाई होलकर के बाद राजा बने तुकोजीराव होलकर प्रथम ने फिर इंदौर को अपनी राजधानी बनाया।

कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर गोंड रानी कमलापति के नाम पर इसका नाम रखा। इसके बाद से ही सरकार के इस कदम पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि गोंड रानी कमलापति ने एक मुस्लिम से शादी की थी। दूसरी खबर यह है कि गोंड आदिवासी अपने को हिंदू बताए जाने से भी नाराज हैं। उनका कहना है कि उनकी अलग पहचान, संस्कृति और परंपरा है।

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