हारती लड़ाई में भी भाजपा का जोर - Naya India
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हारती लड़ाई में भी भाजपा का जोर

दिल्ली विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने जिस अंदाज से लड़ा वह सभी पार्टियों के लिए सबक है। दिल्ली के चुनाव नतीजों का आभास जब सबको हो रहा था तो ऐसा नहीं है कि भाजपा के नेताओं को नहीं हो रहा होगा। उनको भी निश्चित रूप से अंदाजा होगा कि जीतना मुश्किल है। चुनाव से पहले ही भाजपा को इसका स्पष्ट संकेत हो चुका था तभी इस बार नरेंद्र मोदी की सिर्फ दो रैलियां कराई गईं। उसमें भी उन्होंने एक रैली में तो शाहीन बाग और इस तरह के दूसरे मुद्दों का जिक्र किया पर दूसरी रैली में ऐसे तमाम मसलों पर चुप रहे। सो, नतीजों का स्पष्ट आभास होने के बाद भी भाजपा जैसे लड़ी वह मिसाल है।

भाजपा ने चुनाव प्रचार में सारी ताकत लगाई और सारे हथकंडे आजमाए। पार्टी के दो दर्जन केंद्रीय मंत्री, तीन सौ के करीब सांसद और आधा दर्जन राज्यों के मुख्यमंत्री प्रचार करते रहे। इतना सघन प्रचार भाजपा ने किसी और राज्य में कभी नहीं किया। भाजपा प्राण पण से लड़ी। उसका हार जाना अपनी जगह पर है वह अपने वोट में चार-पांच फीसदी का इजाफा करने में कामयाब रही। दूसरी पार्टियों को खास कर कांग्रेस को इससे सीखना चाहिए कि लड़ाई को पहले ही हारा हुआ मान कर सरेंडर करने से राजनीति नहीं होती है। भाजपा ने हार दीवार पर लिखी देखने के बाद भी पूरी ताकत से चुनाव लड़ा।

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