केजरीवाल को निशाना बनाना भारी पड़ा - Naya India
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केजरीवाल को निशाना बनाना भारी पड़ा

ऐसा लग रहा था कि भारतीय जनता पार्टी पिछली बार की दिल्ली की हार से सबक लेगी और अरविंद केजरीवाल को ही निशाना बनाने की रणनीति से बचेगी। पर ऐसा नहीं हुआ। ध्यान रहे 2015 के चुनाव में भाजपा के निशाने पर सिर्फ केजरीवाल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनको नक्सली बता कर उनके ऊपर हमला किया था। दिल्ली में उनकी पहली रैली से लेकर आखिरी रैली तक उनका हमला सिर्फ आप और केजरीवाल के ऊपर था। इसका नतीजा यह हुआ है कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से साफ हुई। वोटों का बंटवारा नहीं हुआ और कांग्रेस के वोट बैंक के लगभग सारे वोट आप को चले गए।

इस बार भी भाजपा ने वहीं गलती की है। पहले दिन से भाजपा नेताओं ने केजरीवाल को निशाना बनाया। उनके कामकाज से ज्यादा उनके ऊपर निशाना साधा गया। ध्रुवीकरण के प्रयासों के तहत दिल्ली के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने उनको आतंकवादी तक कह दिया। जब वे कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर गए तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने उनको मंदिर अपवित्र करने वाला बता दिया। इस तरह से भाजपा ने अपने हर बयान और हमले से अपना मुकाबला केजरीवाल से बनाया। सोचें, एक तरफ भाजपा उम्मीद कर रही थी कि कांग्रेस वोट काटेगी तो उसे फायदा होगा और दूसरी ओर आप के साथ सीधी लड़ाई बना रही थी। सीधी लड़ाई का नुकसान भाजपा को यह हुआ कि लोगों ने कांग्रेस को वोट ही नहीं दिया।

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