एक्जिट पोल में भी भाजपा नहीं हारती! - Naya India
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एक्जिट पोल में भी भाजपा नहीं हारती!

ऐसा क्यों होता है कि किसी भी चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में चुनाव बाद के सर्वेक्षण यानी एक्जिट पोल में भाजपा नहीं हारती है? क्या यह सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियों और उनका प्रसारण करने वाले मीडिया समूहों का पक्षपात है या जमीन पर सर्वेक्षण के दौरान जनता ऐसा आभास देती है। दोनों बातें कुछ कुछ सही हैं। कुछ तो चैनलों और सर्वेक्षण एजेंसियों का पूर्वाग्रह होता है और कुछ भाजपा के मतदाताओं का मुखर होना भी होता है। जमीन पर भाजपा हमेशा ही हवा बनाने में कामयाब हो जाती है, जबकि दूसरी पार्टियां इसमें पिछड़ जाती हैँ।

तभी इस बार के बिहार चुनाव के एक्जिट पोल के नतीजों में सिर्फ एक या दो समूहों को छोड़ दें तो बाकी सबने कड़ी टक्कर दिखाई है और भाजपा को फायदा बताया है। इंडिया टुडे-एक्सिस पोल ने भाजपा और जनता दल यू की निर्णायक हार बताई है और टुडेज चाणक्य ने भी एनडीए को हारता बताया है। एक्सिस ने पिछली बार सीएनएन-आईबीएन चैनल के साथ मिल कर सर्वेक्षण किया था और एक्जिट पोल में कहा था कि भाजपा गठबंधन की निर्णायक हार होगी। उसने कहा था कि भाजपा को 64 और महागठबंधन को 176 सीटें आएंगी। बिल्कुल इसी तर्ज पर भाजपा को 59 और महागठबंधन को 178 सीटें आईं। दूसरी ओर टुडेज चाणक्य ने 2015 में एक्जिट पोल में कहा था कि महागठबंधन को 83 और एनडीए को 155 सीटें आएंगी। उसने महागठबंधन को जितनी सीटें बताई थीं, उससे दोगुने से ज्यादा सीटें उसको मिलीं।

बहरहाल, पिछले चुनाव में यानी 2015 में सीएनएन-एक्सिस के अलावा बाकी पांच एक्जिट पोल में भाजपा गठबंधन को एक सौ से ज्यादा सीटें बताई गई थीं। चार में तो भाजपा की सरकार बन रही थी और एक में कांटे का मुकाबला था। लेकिन अंत में भाजपा गठबंधन को सिर्फ 59 सीटें मिलीं। इस बार भी दो को छोड़ कर बाकी सारे सर्वेक्षण भाजपा की सरकार बना रहे हैं या बेहद करीबी मुकाबला बता रहे हैं। जो दो एक्जिट पोल भाजपा को हरवा रहे हैं उनमें एक इंडिया टुडे-एक्सिस है और दूसरा टुडेज चाणक्य है। पिछली बार इंडिया टुडे ने सिसरो के साथ सर्वेक्षण किया था और राज्य में भाजपा को 120 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था।

बहरहाल, अगर एक्जिट पोल में चैनल कांटे के मुकाबले में राजद-कांग्रेस गठबंधन को आगे दिखा रहे हैं तो इसका मतलब है कि मुकाबला एकतरफा है। वह तो सर्वेक्षण एजेंसियों और मीडिया समूहों का सद्भाव है, जो कांटे का मुकाबला बनवाए हुए हैं। उसमें भी यह सद्भाव भाजपा के प्रति कुछ ज्यादा है क्योंकि जदयू को तो सब हरवा रहे हैं। जो सर्वेक्षण जदयू को बुरी तरह से हरवा रहे हैं उनको भी लग रहा है कि भाजपा को कुछ फायदा हो जाएगा या कम से कम नुकसान नहीं होगा।

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