बिहार में भाजपा की तैयारी

बिहार में कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि भाजपा ने प्रदेश की सभी 243 सीटों के लिए अपने प्रभारी क्यों नियुक्त किए? भाजपा का जवाब है कि अभी सीटों का बंटवारा तय नहीं हुआ है। पिछला यानी 2015 का चुनाव भाजपा ने जदयू से अलग लड़ा था और ज्यादा सीटों पर लड़ा था। उसने सभी सीटों पर इसलिए प्रभारी नियुक्त किया है क्योंकि उसे पता नहीं है कि उसके हिस्से में कौन सी सीटें आनी हैं। पर यह अधूरा जवाब है। अधूरा जवाब इसलिए है क्योंकि कई जानकार कई महीनों से बता रहे हैं कि दोनों पार्टियों के बीच सीट का बंटवारा लगभग हो गया है। वैसे भी दोनों पार्टियां सन 2000 के चुनाव से एक साथ मिल कर लड़ रही हैं। दोनों ने पिछले 20 साल में सिर्फ एक विधानसभा चुनाव अलग लड़ा है और चार चुनाव साथ लड़ा है। इसलिए सबको पता है कि किसके खाते में कौन सी सीट जाने वाली है।

इसके बावजूद अगर भाजपा ने सभी सीटों पर प्रभारी नियुक्त किए हैं और हर प्रभारी को बूथ कमेटी यानी हर बूथ पर सात लोगों की सप्तर्षि वाली टीम बनाने को कहा है तो इसका बड़ा राजनीतिक मतलब है। इसका यह मतलब निकाला जा रहा है कि चुनाव आने तक राजनीतिक समीकरण बदल भी सकता है। एक कारण यह बताया जा रहा है कि भाजपा बराबर सीटों के लिए दबाव बनाने की रणनीति के तहत काम कर रही है, जबकि जदयू को भाजपा से ज्यादा सीटों पर लड़ना है। दोनों असल में चुनाव बाद की राजनीति को ध्यान में रख कर अपनी अपनी गोटियां बैठा रहे हैं।

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