Keshav Maurya BJP MLA ट्विटर पर मना रहे थे केशव मौर्य
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ट्विटर पर मना रहे थे केशव मौर्य

भारत की राजनीति में आमतौर पर यह देखने को मिला है कि जैसे ही कोई नेता पार्टी छोड़ता है उस पार्टी के सारे नेता उसके पीछे पड़ जाते हैं और उसकी आलोचना शुरू हो जाती है, भले उस नेता ने कितना ही समय उस पार्टी में क्यों न बिताया हो। उस लिहाज से स्वामी प्रसाद मौर्य या दारा सिंह चौहान तो भाजपा में अपेक्षाकृत नए थे और पार्टी छोड़ दी तो उनकी आलोचना करने के कई प्वाइंट थे। आलोचना और बुराई हो भी रही है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि राज्य के उप मुख्यमंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को सार्वजनिक रूप से मनाया। कुछ मामलों में नेताओं को फोन करके या मध्यस्थ भेज कर मनाने का प्रयास जरूरी होता रहा है लेकिन सार्वजनिक रूप से मनाने की हाल के दिनों की यह संभवतः पहली मिसाल है। Keshav Maurya BJP MLA

जब स्वामी प्रसाद मौर्य ने राज्य सरकार में मंत्री पद और भाजपा छोड़ने का ऐलान किया तो केशव प्रसाद मौर्य ने ट्विट करके लिखा- आदरणीय स्वामी प्रसाद मौर्य जी ने किन कारणों से इस्तीफा दिया है मैं नहीं जानता हूं। उनसे अपील है कि बैठ कर बात करें। जल्दबाजी में लिए हुए फैसले अक्सर गलत साबित होते हैं। इसी तरह इसके अगले दिन जब दारा सिंह चौहान ने इस्तीफा दिया तो केशव प्रसाद मौर्य ने ट्विट किया- परिवार का कोई सदस्य भटक जाए तो दुख होता है। जाने वाले आदरणीय महानुभावों को मैं बस यही आग्रह करूंगा कि डूबती हुई नाव पर सवार होने से नुकसान उनकी ही होगा। बड़े भाई दारा सिंह जी आप अपने फैसले पर पुनर्विचार करिए।

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सवाल है कि इस तरह सार्वजनिक रूप से नेताओं को मनाने का ट्विट करके मौर्य क्या मैसेज दे रहे थे? क्या किसी रणनीति के तहत उन्होंने ट्विट किया ताकि पिछड़ी और दलित जातियों में यह मैसेज बनवाया जाए कि भाजपा ने उनके समाज के नेताओं को पूरे सम्मान के साथ रोकने का प्रयास किया? या इसके पीछे कोई गहरी कहानी है? कई जानकार बता रहे हैं कि लखनऊ  से लेकर दिल्ली तक पार्टी के अंदर चल रही भितरघात की राजनीति की वजह से यह भगदड़ मची है। पिछले पांच साल मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के बीच कैसा संबंध रहा है यह सबको पता है।

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