छोटी सहयोगी पार्टियों का क्या होगा?

भाजपा की छोटी सहयोगी पार्टियां भी मंत्रिपरिषद के विस्तार की आस लगाए बैठी हैं। वैसे अपनी पार्टी के इकलौते सांसद रामदास अठावले को पिछली बार में ही मंत्री बना बना दिया गया था। इसी तरह दो सांसदों वाली पार्टी अकाली दल को भी एक मंत्री पद मिल गया था। छह सांसदों वाली लोक जनशक्ति पार्टी की ओर से भी रामविलास पासवान को मंत्री बना दिया गया है। पर उत्तर प्रदेश की सहयोगी अपना दल को इस बार मंत्री पद नहीं मिला है। पिछली सरकार में अनुप्रिया पटेल स्वास्थ्य राज्यमंत्री थीं। जानकार सूत्रों के मुताबिक अगले विस्तार में उनकी पार्टी को भी केंद्र सरकार में शामिल किया जा सकता है।

झारखंड में भाजपा की सहयोगी आजसू का एक सांसद है। हालांकि विधानसभा चुनाव में भाजपा और आजसू दोनों अलग लड़े थे और माना जा रहा है कि भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण यहीं था। अगर दोनों पार्टियां साथ लड़ी होतीं तो भाजपा को बहुमत मिल जाता। अब एक बार फिर भाजपा और आजसू के तार जुड़ सकते हैं। झारखंड में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए भाजपा को आजसू की जरूरत है। तभी कहा जा रहा है कि उसके इकलौते सांसद को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है।

इसी तरह हरियाणा में नई बनी सहयोगी जननायक जनता पार्टी के नेता भी एक मंत्री पद के लिए दबाव बना रहे हैं। हालांकि उनका एक भी सांसद नहीं है पर कहा जा रहा है कि तालमेल की शर्तों के तहत तय हुआ था कि राज्यसभा की पहली सीट जजपा को मिलेगी। सो, दिल्ली के चुनाव में अपनी उपयोगिता देखते हुए पार्टी के नेता राज्यसभा सीट के साथ साथ मंत्री पद भी मांग रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि रामविलास पासवान की पार्टी एक और मंत्री पद के लिए दबाव बना सकती है। जानकार सूत्रों के मुताबिक रामविलास पासवान सेहत के हवाले रिटायर होकर बेटे को मंत्री बनाना चाहते हैं। इसके साथ ही अपनी हाजीपुर सीट से जीते भाई पशुपति पारस को भी मंत्री बनवाना चाहते हैं।

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