एनआरसी पर भाजपा की दुविधा

भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी पूरे देश में लागू करने को लेकर कोई दुविधा नहीं है। पार्टी के नेता अनौपचारिक बातचीत में हर जगह कहते हैं कि सरकार इसे लागू करेगी और एक-एक घुसपैठिए की पहचान करके उसे देश से बाहर किया जाएगा। लेकिन भाजपा इस बात को लेकर दुविधा में है कि वह इसे राजनीतिक मुद्दा कैसे बनाए। अभी बिहार में चुनाव होने हैं, जहां भाजपा को नीतीश कुमार के साथ लड़ना है और नीतीश कुमार ने दो टूक अंदाज में कहा है कि वे एनआरसी का समर्थन नहीं करेंगे। भाजपा की दूसरी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी भी एनआरसी का समर्थन नहीं करेगी। सो, अगर भाजपा को जदयू और लोजपा के साथ मिल कर लड़ना है तो उसे एनआरसी का मुद्दा छोड़ना होगा।

भाजपा की असली दुविधा या समस्या इस बात को लेकर है कि वह अगर बिहार में एनआरसी का मुद्दा छोड़ती है तो उसके लिए पश्चिम बंगाल में इसे बड़ा मुद्दा बनाना आसान नहीं होगा। ऐन मौके पर जाकर भाजपा इसे मुद्दा बना कर चुनाव नहीं लड़ सकती है। यह भी तय है कि भाजपा को पश्चिम बंगाल में एनआरसी के मुद्दे पर ही लड़ना है। असल में बंगाल में 29 फीसदी मुस्लिम आबादी है और भाजपा के पास ध्रुवीकरण के लिए ब्रह्मास्त्र के रूप में एनआरसी है। भाजपा और संघ दोनों बहुत पहले से दावा करते रहे हैं कि कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल में शरण दे रखी है। इस प्रचार का फायदा भाजपा को लोकसभा में मिल चुका है और उसे उम्मीद है कि विधानसभा में भी मिलेगा। भाजपा के कई नेता मान रहे हैं कि पार्टी को बिहार में नीतीश से अलग होकर एनआरसी के मुद्दे पर लड़ना चाहिए। हो सकता है कि पार्टी बिहार में हार जाए पर इससे बंगाल जीतना आसान हो जाएगा।

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