BJP Party Political crisis इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी
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राज्यों में भाजपा का घमासान!

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BJP Party Political crisis इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व बहुत मजबूत है और उसकी मर्जी के बगैर पत्ता तक नहीं हिलता है लेकिन यह भी हकीकत है कि कई राज्यों में भाजपा के अंदर घमासान छिड़ा है। यह अलग बात है कि राष्ट्रीय मीडिया में सिर्फ कांग्रेस संगठन को झगड़ों की खबरें चलती हैं। केरल से लेकर पंजाब तक कांग्रेस के झगड़े तो राष्ट्रीय मीडिया में दिख रहे हैं लेकिन छत्तीसगढ़ से लेकर त्रिपुरा और कर्नाटक से लेकर राजस्थान, झारखंड, महाराष्ट्र आदि राज्यों में चल रहे भाजपा के झगड़े पर किसी की नजर नहीं है।

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान की खबरें कई दिन तक देश भर में चलीं लेकिन उसी छत्तीसगढ़ में भाजपा के अंदर भी कम घमासान नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के बीच ऐसी तनातनी है कि जगदलपुर में हुए चिंतन शिविर में दोनों खेमों ने अपनी ताकत दिखाई। कुछ केंद्रीय नेताओं की मदद से अग्रवाल खेमे ने रमन सिंह खेमे को हाशिए में डाल दिया। विवाद इतना साफ दिखने लगा था कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक दीपक विस्फुटे और प्रांत प्रचारक प्रेमशंकर सिदार चिंतन शिविर में गए ही नहीं।

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उधर त्रिपुरा में मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने लंबी जद्दोजहद के बाद अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। बुधवार को तीन नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई लेकिन भाजपा के पांच बागी विधायक शपथ समारोह में शामिल नहीं हुए। पूर्व मंत्री सुदीप रॉय बर्मन के नेतृत्व में उन्होंने अलग बैठक की। पश्चिम बंगाल में पार्टी का एक खेमा अलग उत्तर बंगाल राज्य के गठन की मांग कर रहा है तो दूसरा खेमा इसका विरोध कर रहा है। एक खेमा तृणमूल नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है तो दूसरा इसके विरोध में पार्टी छोड़ रहा है। दो दिन में दो विधायकों- तन्मय घोष और बिस्वजीत दास ने पाला बदल कर तृणमूल का दामन थाम लिया।

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कर्नाटक में मंत्री बनने से रह गए भाजपा विधायकों ने सीधा मोर्चा खोला है और मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई व पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा उन्हें समझाने में लगे हैं। हालांकि येदियुरप्पा के बेटे को मंत्री नहीं बनाने से उनके समर्थक खुद ही नाराज हैं। झारखंड में कुछ समय पहले ही अपनी पार्टी का विलय करके लौटे बाबूलाल मरांडी अपने दो-तीन चेले चपाटों के सहारे सरकार गिराने की मुहिम में लगे हैं। लेकिन खुद भाजपा मुख्यमंत्री और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के तीन खेमे में बंटी है। महाराष्ट्र में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, केंद्रीय मंत्री नारायण राणे और प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के तीन खेमे बने हैं और तीनों अलग अलग रास्ते चल रहे हैं। राजस्थान में भाजपा वसुंधरा राजे के समर्थक और विरोधियों के खेमे में बंटी है। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय ने ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ गा तो दिया लेकिन इससे अंदरूनी कलह थमी नहीं है।

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