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भाजपा के अंतर्कलहः न चर्चा, न खबर!

कांग्रेस पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है इस बात की चर्चा पिछले सात साल से चल रही है। हर बार जब कांग्रेस का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो इस बात की चर्चा होती है कि पार्टी खत्म होने की ओर बढ़ रही है और पार्टी आलाकमान यानी राहुल गांधी किसी लायक नहीं हैं। उनकी टीम बहुत खराब है और इसलिए कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ रहे हैं या पार्टी में अंतर्कलह है। लेकिन ऐसा ही कुछ भाजपा में भी होता है तो उसकी चर्चा नहीं होती है। हकीकत यह है कि इस समय कांग्रेस से ज्यादा अंतर्कलह भाजपा में चल रही है लेकिन मीडिया में न तो सामने दिख रही खबर दिखाई जाती है और न सूत्रों के हवाले से कोई खबर आती है।

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उत्तर प्रदेश में पिछले तीन महीने से ज्यादा समय से तनाव है। प्रधानमंत्री के करीबी आईएएस अधिकारी एके शर्मा को दिल्ली से जाते ही प्रदेश में उप मुख्यमंत्री बनना था और गृह व कार्मिक विभाग संभालना था। लेकिन वे तीन महीने से बनारस में कोविड प्रबंधन देख रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने उनको उप मुख्यमंत्री बनाने से इनकार कर दिया। मुख्यमंत्री का सीधे प्रधानमंत्री से टकराव हुआ, अपने एक उप मुख्यमंत्री से तनातनी चल रही है और प्रदेश के संगठन महामंत्री को हटवाने के लिए वे पूरा जोर लगाए हुए हैं। इसके अलावा खबर है कि पार्टी के बड़े नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों का उनको समर्थन हासिल है। पार्टी आलाकमान को इसकी खबर है और यह भी बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने दोनों से पिछले एक महीने में छह-सात बात मुलाकात की है। परंतु अंतर्कलह की खबरें मुख्यधारा मीडिया से गायब हैं।

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जानकार सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र भाजपा में भारी घमासान है। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल दोनों की राजनीतिक अलग अलग है। फड़नवीस को लेकर पार्टी के दोनों शीर्ष नेताओं में भी एक राय नहीं है। जिस तरह से योगी आगे के लिए चुनौती माने जा रहे हैं वैसे ही फड़नवीस भी चुनौती बनते दिख रहे हैं। सो, किसी तरह से उनको हाशिए में रखने का प्रयास चल रहा है। मध्य प्रदेश में कैसे पार्टी के आधा दर्जन बड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया, यह पिछले दिनो देखने को मिला।

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बिहार में पार्टी साफतौर पर दो खेमों में बंटी हुई है और दोनों खेमों की राजनीति से ही भाजपा की सहयोगी जनता दल यू को अपनी ताकत बढ़ाने का मौका मिल रहा है। दोनों खेमे आपस में लड़ कर पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। असम में टकराव रोकने के लिए पार्टी आलाकमान की सर्बानंद सोनोवाल को दिल्ली लाने की योजना है तो पश्चिम बंगाल में भाजपा के पुराने नेता बनाम दूसरी पार्टियों से आए नेताओं का टकराव सार्वजनिक हो गया है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय हाल ही में भाजपा छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस में गए हैं। झारखंड में स्थिति ऐसी है कि तीन पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष मिल कर चार अलग अलग खेमे चला रहे हैं।

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