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Friday, May 7, 2021
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भाजपा के खाते में दो और राज्यसभा सीटें

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भारतीय जनता पार्टी धीरे धीरे राज्यसभा में बहुमत की ओर बढ़ रही है। ऐसा नहीं है कि वह राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीती है और वहां से राज्यसभा में उसके सदस्य चुन कर आ रहे हैं, जिससे उसकी ताकत बढ़ रही है। असल में इसका उलटा हो रहा है। वह राज्यों में हार रही है या विधानसभाओं में उसकी ताकत कम हो रही है पर राज्यसभा में उसकी संख्या बढ़ रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि भाजपा के शासन वाले राज्यों में विपक्षी पार्टियों के राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा हो रहा है और उनकी जगह भाजपा के नेता चुन कर उच्च सदन में जा रहे हैं। पिछले दिनों भाजपा ने सबसे बड़ी उलटफेर आंध्र प्रदेश में की थी, जहां टीडीपी के छह में से चार राज्यसभा सांसदों ने पाला बदल कर भाजपा का दामन थाम लिया था।

बहरहाल, अब दो और सीटें भाजपा के खाते में जा रही हैं। इस समय भाजपा के राज्यसभा सांसदों की संख्या 81 है। 12 दिसंबर को दो सीटों के उपचुनाव हो रहे हैं उनके भाजपा के खाते में जाने से यह संख्या बढ़ कर 83 हो जाएगी। कांग्रेस के इस समय 46 सांसद हैं। इस तरह भाजपा की संख्या उससे लगभग दोगुनी हो जा रही है। भाजपा के खाते में जाने वाली दो नई सीटों में से एक सीट कांग्रेस की और एक सपा की है। कर्नाटक से कांग्रेस के सांसद के राममूर्ति ने इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। दूसरी सीट उत्तर प्रदेश की है, जहां सपा की सांसद तंजीम फातिमा ने राज्यसभा छोड़ कर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। ये दोनों सीटें अब भाजपा के खाते में चली जाएंगी।

पहले ही सपा, कांग्रेस, इनेलो के कई राज्यसभा सांसद इस्तीफा देकर भाजपा के साथ जा चुके हैं। इससे उच्च सदन में विपक्षी पार्टियों के सांसदों की संख्या कम हो रही है और सत्तापक्ष की संख्या बढ़ रही है। तभी सरकार विवादित विधेयक भी आसानी से पास करा पा रही है। संसद के शीतकालीन सत्र में भी सरकार नागरिकता संशोधन विधयेक लाने वाली है। सरकार को भरोसा है कि वह इसे भी पास करा लेगी, जैसे उसने कश्मीर पर प्रस्ताव पास कराया और तीन तलाक बिल पास कराया।

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