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राज्यसभा में भाजपा की बढ़ती ताकत

संसद के उच्च सदन में भारतीय जनता पार्टी की ताकत बढ़ रही है। पिछले तीन महीने में उसे दो सीटों का फायदा हुआ है, राज्यसभा में उसके सदस्यों की संख्या बढ़ कर 94 हो गई है। हालांकि अब भी भाजपा बहुमत से बहुत दूर है पर उसके अपने सांसदों की संख्या एक सौ के करीब पहुंचने वाली है, जो एक बड़ी राजनीतिक घटना होगी। हाल के दिनों में किसी पार्टी के पास उच्च सदन में एक सौ सांसद नहीं रहे हैं।

असल में भाजपा पिछले दो साल से उच्च सदन में अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। पर अभी दो सीटों का फायदा संयोग से हो गया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल के निधन से खाली हुई सीट भाजपा को मिल गई है। ध्यान रहे अहमद पटेल ने बड़ी घमासान लड़ाई में यह सीट जीती थी। कांग्रेस के कई विधायकों के टूटने के बाद पार्टी विधायकों को कर्नाटक में रखा गया था और उसके बाद भी आधे वोट के अंतर से अहमद पटेल जीते थे। गुजरात से भाजपा के एक सांसद अभय भारद्वाज का भी कोरोना से निधन हो गया था। इन दोनों सीटों के उपचुनाव में भाजपा के दो नेता- दिनेशचंद्र जेमलभाई अननवाडिया और रामभाई हरिजीभाई मोकारिया निर्विरोध जीत गए हैं।

भाजपा को दूसरी सीट का फायदा बिहार में हुआ। भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन से एक सीट खाली हुई थी। कायदे से वह सीट लोजपा को ही जानी चाहिए थी लेकिन पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में लोजपा नेता चिराग पासवान ने बिहार में अपने को एनडीए से अलग करते हुए नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू के खिलाफ उम्मीदवार उतारे। लोजपा के लड़ने का नुकसान जदयू को हुआ और फायदा भाजपा को हो गय़ा। उसने रामविलास पासवान की खाली हुई सीट पर अपने वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी को उच्च सदन में भेजा।

इससे पहले भाजपा ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसदों से इस्तीफा दिलवाया था और फिर अपनी पार्टी से उन्हें उच्च सदन में भेजा। भुवनेश्वर कलीता से लेकर नीरज शेखर तक कई सांसदों के साथ ऐसा खेल हुआ। उधऱ आंध्र प्रदेश में भाजपा ने अपनी पुरानी सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी में तोड़-फोड़ कर दी थी और उसके चार सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया था। इस तरह भाजपा ने उच्च सदन में अपनी ताकत बढ़ाई है। अब आगे पार्टी की ताकत बढ़ती है या घटनी शुरू हो जाती है यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहता है और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहता है। ध्यान रहे भाजपा को सबसे ज्यादा सीटों का फायदा उत्तर प्रदेश से ही हुआ है।

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