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तमिलनाडु, पुड्डुचेरी में भाजपा की मुश्किल

भारतीय जनता पार्टी ने इस बार तमिलनाडु और पुड्डुचेरी के लिए खास रणनीति बनाई थी। पुड्डुचेरी में ऐन चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी टूट कराई गई। उसके पांच विधायकों का इस्तीफा हुआ। डीएमके विधायक ने भी इस्तीफा दिया। विधायकों की मांग मानते हुए ऐन चुनाव से पहले उप राज्यपाल किरण बेदी को हटाया गया और कार्यवाहक उप राज्यपाल ने शक्ति परीक्षण कराया, जिसमें कांग्रेस की सरकार गिर गई। उसके बाद लग रहा था कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रंगास्वामी की पार्टी और अन्ना डीएमके, भाजपा मिल कर लड़ेंगे। पर अब खबर है कि रंगास्वामी अकेले लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ध्यान रहे वे राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी हैं और पूरे राज्य में उनका मजबूत असर है। अगर वे अलग लड़ते हैं तो अन्ना डीएमके और भाजपा का तालमेल काम नहीं कर पाएगा।

इसी तरह तमिलनाडु में ऐन चुनाव से पहले वीके शशिकला जेल से निकल कर आईं और भाजपा ने अन्ना डीएमके और शशिकला के बीच समझौता कराने का प्रयास किया। लेकिन ऐसा लग रहा है कि उसका दांव नहीं चल रहा है। शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरण ने अपनी पार्टी का विलय अन्ना डीएमके में करने से इनकार कर दिया है। वे तालमेल के लिए तैयार हैं पर अन्ना डीएमके के दोनों नेता- मुख्यमंत्री पलानीसामी और उप मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम दोनों तालमेल पर राजी नहीं हो रहे हैं। अन्ना डीएमके और भाजपा के बीच भी सीट बंटवारे का मुद्दा अटक गया है। पिछली बार 234 सीटों में से 227 पर अकेले लड़ी अन्ना डीएमके इस बार सहयोगियों में सीटें बांट रही है। उसकी अपनी सीटें कम हो रही हैं। इसलिए वह भाजपा को न तो उसकी मांगी संख्या के बराबर सीट दे रही है और न उसकी मनचाही सीटें दे रही है। खबर है कि भाजपा ने 24 सीटें मांगी हैं।

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