चुनाव तक सीएए से तौबा!

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केंद्र सरकार ने सितंबर 2019 में संशोधिक नागरिकता कानून, सीएए संसद से पास कराया था और उसी महीने राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी भी दी थी। उसके बाद करीब डेढ़ साल में केंद्र सरकार इसके नियम नहीं बना पाई है। सोचें, जून 2019 में अध्यादेश के जरिए कृषि कानून बदले गए थे और तत्काल की इसके नियम बना कर इनको लागू कर दिया गया था। लेकिन भाजपा और आरएसएस के दिल के सबसे करीब जो मुद्दा था उस पर कानून बनने के डेढ़ साल बाद तक नियम ही नहीं बन पाया। सरकार ने पड़ोसी देशों से प्रताड़ित होकर ने वाले गौर मुस्लिमों को को नागरिकता देने का प्रावधान इस कानून में किया है। भाजपा और संघ के लोग दशकों से कहते रहे हैं कि दुनिया में हिंदुओं का सिर्फ एक ही देश है और कहीं भी हिंदु के ऊपर अत्याचार होता है तो उसे भारत आने का हक है। लेकिन वहीं हक देने वाला कानून डेढ़ साल से लागू नहीं हो पा रहा है।

अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद में कहा है कि उसे पांच-छह महीने और लगेंगे, इस कानून के नियम बनाने में। कुछ दिन पहले ही भाजपा के नेताओं ने कहा था कि जनवरी से पश्चिम बंगाल में सीएए लागू होना शुरू हो जाएगा। लेकिन अब आधिकारिक रूप से चुनाव तक इस कानून से तौबा हो गई है। बंगाल में अप्रैल-मई में चुनाव होने वाले हैं और यह कानून उसके बाद ही लागू होगा। ऐसा लग रहा है कि असम की चुनावी चिंता में सरकार ने इस कानून को लटकाया है। असम में इसका जोरदार विरोध हो रहा है और वहां के स्थानीय लोगों को लग रहा है कि बांग्लादेश से आए हिंदुओं को नागरिकता देने से असम की स्थानीय संस्कृति खत्म हो जाएगी और राज्य में बांग्लाभाषियों की आबादी ज्यादा हो जाएगी। लग रहा है कि इसी चिंता में सरकार ने कानून पर अमल टाल दिया है।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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