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पुराने नामों की फिर से चर्चा

जैसे ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल या विस्तार की चर्चा होती है वैसे ही कुछ नाम चर्चा में आ जाते हैं। पिछले छह साल से जो नाम लगभग हर बार चर्चा में आते हैं उनमें एक राम माधव का है। राम माधव को पिछले दिनों पार्टी के महासचिव पद से हटाया गया। वे प्रधानमंत्री के करीबी हैं और इसलिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार वे मंत्री बनेंगे। संभव है कि नवंबर में उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा के चुनावों में उन्हें उच्च सदन में भेजा जाए।

पुरानी टीम के जिन चार महासचिवों को जेपी नड्डा की टीम में जगह नहीं मिली है उनमें राम माधव के अलावा अनिल जैन दूसरे महासचिव हैं, जिनको केंद्र सरकार में जगह मिल सकती है। इसी तरह पार्टी के उपाध्यक्ष रहे विनय सहस्त्रबुद्धे को भी संगठन में जगह नहीं मिली है। वैसे उन्हें आईसीसीआर का अध्यक्ष बनाया गया है। हर बार की तरह इस बार भी उनके मंत्री बनने की चर्चा शुरू हो गई है।

मोदी की सरकार में दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। पार्टी संगठन में भी दक्षिण व पूर्वोत्तर के नेताओं के महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा दिल्ली से एक सांसद को मंत्रिमंड़ल में जगह मिल सकती है और झारखंड से भी किसी को मंत्री बनाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व सरकार में बढ़ना तय है। अगर हिमंता बिस्वा सरमा तैयार होते हैं तो उन्हें भी केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश से कम से कम दो मंत्री बन सकते हैं, जिनमें एक ब्राह्मण चेहरा हो सकता है।

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