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सिंधिया और उनके समर्थकों की मुश्किल

ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में शामिल हुए नौ महीने होने वाले हैं और अभी तक राज्यसभा की सीट मिल पाई है। मंत्री पद की उम्मीद अभी अधूरी है। उनके समर्थक पहले दिन से इस इंतजार में हैं कि वे नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री बनने वाले हैं। पर किसी न किसी कारण से केंद्र सरकार में विस्तार का फैसला टलता जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि फैसला अभी टला ही रहेगा। प्रधानमंत्री नए साल में ही सरकार का विस्तार करेंगे। तब तक सिंधिया को मंत्री बनने के लिए इंतजार करना होगा। मध्य प्रदेश में उनके कई समर्थकों का भी खेल बिगड़ा है। उनमें से कुछ का इंतजार तो अगले चुनाव तक चलेगा।

सिंधिया समर्थक तीन मंत्री चुनाव हार गए। बहुचर्चित मंत्री इमरती देवी, एंदल सिंह कसाना और गिरिराज दंडोतिया के पास अब कोई चारा नहीं है कि अगले चुनाव तक इंतजार करें। सिंधिया के करीबी दो और मंत्रियों- गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट बिना विधायक बने छह महीने तक राज्य सरकार में मंत्री रहे। लेकिन छह महीने की सीमा पूरी होने के बाद उनको इस्तीफा देना पड़ा। अब अभी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तत्काल सरकार का विस्तार करने के मूड में नहीं हैं। अगर अगले सात-आठ दिन में मध्य प्रदेश में सरकार का विस्तार नहीं होता है तो एक महीने और फेरबदल टला रहेगा। इस तरह एक तरफ दिल्ली में सिंधिया का इंतजार लंबा हो रहा है तो भोपाल में उनके समर्थकों का। यह भी देखना दिलचस्प होगा कि अगली फेरबदल में सिंधिया अपने कितने समर्थकों को शिवराज सरकार में जगह दिला पाते हैं। क्योंकि अब शिवराज की सरकार उनके समर्थक विधायकों के भरोसे नहीं है, बल्कि भाजपा का अपना पूर्ण बहुमत है।

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