केंद्र को विशेषज्ञों की जरूरत नहीं

ऐसा लग रहा है कि कोरोना वायरस से लड़ने का मामला हो या उसके बाद देश की अर्थव्यवस्था संभालने की चिंता हो, भारत सरकार को किसी विशेषज्ञ की कोई जरूरत नहीं है। सारे सरकारी या तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभाल रहे हैं या भारत सरकार के अधिकारियों को सब चीज की जिम्मेदारी दी गई है। विशेषज्ञ के नाम पर ले-देकर आईसीएमआर के एक डॉक्टर हैं रमन गंगाखेडकर, जिनको हर दिन होने वाले विदेश, गृह व स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कांफ्रेंस में बैठा दिया जाता है। बाकी प्रेस कांफ्रेंस को ज्यादातर मंत्रालयों के अधिकारी ही संचालित करते हैं। अब स्थिति यह है कि मंत्रालयों से लेकर रिजर्व बैंक और नीति आयोग तक सरकार के पास कोई विशेषज्ञ नहीं है, सारे आईएएस अधिकारी बैठे हैं। कोरोना से लड़ने के लिए बने अधिकार प्राप्त समूहों भी सब अधिकारियों के ही हैं, जबकि अमेरिका में टास्क फोर्स का जिम्मा प्रमाणित काबिलियत वाले डॉक्टर के हाथ में है, जो सार्वजनिक प्रेस कांफ्रेंस में राष्ट्रपति की बात काटने या उससे उलट बात कहने की हिम्मत रखता है।

लगता भी नहीं है कि सरकार अधिकारियों की बजाय विशेषज्ञों को किसी काम में शामिल करेगी। उसके पास जितने विशेषज्ञ थे, सब एक-एक करके चले गए। ऐसे ही एक विशेषज्ञ रघुराम राजन ने पिछले दिनों कहा कि सरकार को कोरोना से पैदा हो रहे आर्थिक संकट से लड़ने के लिए ऐसे विशेषज्ञों की सेवा लेने की जरूरत है, जिनकी काबिलियत प्रमाणित है। उनके यह कहने के साथ ही पश्चिम बंगाल की सरकार ने पिछली बार के नोबल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी को सरकार का सलाहकार नियुक्त किया। उन्होंने एक ग्लोबल एडवाइजरी बोर्ड बनाई, जिसमें बनर्जी सहित कई और लोगों को शामिल किया जा रहा है। यह बोर्ड सरकार को कोरोना का संकट खत्म होने के बाद आर्थिक संकट से निपटने में सुझाव देगा साथ ही इस बात के बारे में भी सरकार को राय-मशविरा देगा कि संकट के समय में कैसे आम लोगों की परेशानी को कम करना है।

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