मजदूरों का आंकड़ा भी नहीं बताएगें!

दिल्ली से प्रवासी श्रमिक अपने अपने घर वापसी की उम्मीद से सड़को पर पैदल (PHOTO BY NI)

क्या सचमुच केंद्र सरकार के पास इस बात का आंकड़ा नहीं है कि लॉकडाउन के दौरान शहरों और महानगरों से पलायन करने वाले करीब एक करोड़ मजदूरों में से पलायन के दौरान कितने मरे और कितने लोगों की नौकरी गई? चूंकि सरकार ने खुद ऐसा कहा है और संसद में तीन विपक्षी सांसदों के लिखित जवाब में कहा है इसलिए यकीन नहीं करने का कोई कारण नहीं है। असल में आंकड़ा तो है पर वह सरकारी नहीं है। कई एजेंसियों ने आंकड़ा जुटाया है, जिसके मुताबिक 198 लोगों की जान गई।

पर सरकार यह बात नहीं कह सकती है क्योंकि उसने आंकड़ा नहीं जुटाया है। सो, बड़ा सवाल यह है कि सरकार ने आंकड़ा क्यों नहीं जुटाया? इसलिए नहीं जुटाया क्योंकि अगर सरकार के फैसले की वजह से हुए पलायन और उसमें सैकड़ों लोगों के मरने का आंकड़ा आधिकारिक होगा तो वह आंकड़ा इस सरकार को लंबे समय तक परेशान करता रहेगा। सोशल मीडिया में उसे पेश किया जाएगा और सरकार पर सवाल उठेंगे। विपक्ष हर दिन वह आंकड़ा दिखा कर सरकार को कठघरे में खड़ा करेगा। मीडिया का एक धड़ा भी सरकार की नाकामी बताने के लिए उसका इस्तेमाल करेगा।

यह बिल्कुल नोटबंदी की घटना का दोहराव है। याद करें उस समय भी अपनी मेहनत की कमाई बैंक में जमा कराने या नोट बदलवाने के लिए करोड़ों लोग लाइन में लगे थे और एक सौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। सरकार ने कभी इस बात को स्वीकार नहीं किया क्योंकि सरकार ने नोट बदलने की लाइन में लगे लोगों का आंकड़ा ही नहीं रखा। चूंकि वह आंकड़ा नहीं रखा गया इसलिए सरकार उसके लिए जवाबदेह नहीं हुई।

अगर सरकार नोटबंदी के दौरान लाइन में लगे लोगों के मरने का आंकड़ा रखती है और मरने वालों को मुआवजा दिया होता या लॉकडाउन के दौरान अपने बाल-बच्चों के साथ जान हथेली पर लेकर अपने घर लौटे मजदूरों के मरने का आंकड़ा रखती और उनको मुआवजा देती तो यह हमेशा के लिए एक ठोस और स्थायी दस्तावेज होता। वह दस्तावेज सरकार की नीतियों की विफलता का स्मारक बनता। उससे सरकार की नीतियों और गरीब व मजदूर के प्रति उसकी सोच का मुद्दा बनता। अगर उनकी नौकरी जाने का आंकड़ा रखते तो नौकरी देने का दबाव भी बनता। तभी सरकार ने आंकड़ा ही नहीं जुटाया और कह दिया कि उसके पास कोई आंकड़ा नहीं है और इसलिए मुआवजा देने का सवाल ही नहीं उठता है। इससे क्या होगा कि दो-चार दिन मामला चलेगा और उसके बाद सब ठंडा पड़ जाएगा।

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