नई संसद के निर्माण का क्या होगा? - Naya India
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नई संसद के निर्माण का क्या होगा?

केंद्र सरकार ने सारी योजनाओं पर रोक लगा दी है। अगले साल 31 मार्च तक सिर्फ उन्हीं योजनाओं पर अमल होगा या पैसे आवंटित होंगे, जिनकी घोषणा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत या आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत हुई है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि कोई भी मंत्रालय किसी नई योजना को मंजूरी नहीं देगा, जिन योजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है उन्हें भी पैसे आवंटित नहीं होंगे और इस साल के बजट में जो योजनाएं मंजूर की गई हैं वे भी स्थगित रहेंगी।

सो, अब सवाल है कि नई संसद के निर्माण का क्या होगा? इंडिया गेट से लेकर विजय चौक तक का पूरा लैंडस्केप बदलने के लिए तैयार गई सेंट्रल विस्टा की योजना का क्या होगा? प्रधानमंत्री के नए आवास और नए सचिवालय का क्या होगा? ध्यान रहे कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों सहित ज्यादातर विपक्षी पार्टियां सरकार से इस योजना को रोकने की मांग कर रही हैं। यह मांग कोरोना वायरस का संकट शुरू होने से पहले से हो रही है। विपक्ष को यह पैसे की बरबादी लग रही है और नगर योजना से जुड़े आर्किटेक्ट या इतिहास की समझ रखने वाले बुद्धिजीवी भी इतिहास बोध या सौंदर्य बोध की चिंता में इस योजना का विरोध कर रहे हैं।

पर सरकार अड़ी है कि 2022 तक सेंट्रल विस्टा का निर्माण होगा और जिस समय भारत की आजादी के 75 साल पूरे होंगे उस समय संसद का सत्र नई संसद में होगा। सरकार की योजना के मुताबिक मौजूदा संसद भवन को म्यूजियम में तब्दील कर दिया जाएगा। कोरोना वायरस का संकट शुरू होने और अर्थव्यवस्था पर पड़ी मार की वजह से सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट रोकने की मांग तेज हो गई है। पर सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है। इसका मतलब है कि यह योजना अभी ठंडे बस्ते में नहीं डाली गई है।

विपक्षी पार्टियों के दावों के मुताबिक यह योजना 12 से लेकर 20 हजार करोड़ के बीच की है। सवाल है कि ऐसे आर्थिक संकट के समय इतनी बड़ी रकम नई संसद, नए पीएम आवास, नए सचिवालय पर खर्च करने को सरकार कैसे न्यायसंगत ठहराएगी? यह व्यावहारिक सवाल भी उठाया जा रहा है कि अगर 31 मार्च 2021 तक यह योजना भी रूकी रहती है तो उसके बाद डेढ़ साल में कैसे इसका निर्माण पूरा हो जाएगा ताकि 15 अगस्त 2022 तक आजादी के 75  साल का जश्न नई संसद में मनाया जाए? जो हो सरकार को इस बारे में फैसला करते हुए मौजूदा हालात और व्यावहारिकता को ध्यान में रखना होगा।

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