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नेताओं, पत्रकारों की बेचैनी

ससंद भवन की नई इमारत का ठेका टाटा प्रोजेक्ट्स को दे दिया गया है। सीपीडब्लुडी ने 940 करोड़ रुपए में संसद भवन के निर्माण का अनुमान लगाया था कि टाटा समूह ने कहा है कि वह 861 करोड़ रुपए में ही बना देगी। सोचें, सरकारी अनुमान से कोई दस फीसदी की कमी पर टाटा समूह संसद भवन बनाने को तैयार है। बहरहाल, आगे क्या होगा यह अभी नहीं कहा जा सकता है पर नए भवन का ठेका होने के साथ ही नेताओं और पत्रकारों की बेचैनी बढ़ गई है। पहले से कहा जा रहा है कि नए संसद भवन में सेंट्रल हॉल नहीं रखा जाएगा। पत्रकारों की एक्सेस को भी सीमित करने के लिए कुछ उपाय करने की चर्चा रही है। ध्यान रहे सेंट्रल हॉल में सांसद, पूर्व सांसद और वरिष्ठ पत्रकार बैठते हैं। ज्यादातर अनौपचारिक बातें वहीं होती हैं और खबरें, गॉसिप आदि वहीं से शुरू होती हैं।

कोरोना का संकट शुरू होने से पहले काफी अरसे बाद संसद की जेनरल परपस कमेटी की एक बैठक हुई थी। इस बैठक में नए भवन का डिजाइन तैयार करने वाले विमल पटेल को भी बुलाया गया था। इस बैठक में सांसदों ने दो टूक अंदाज में कहा कि सेंट्रल हॉल रखा जाना चाहिए। इसके अलावा सांसदों ने नए भवन की डिजाइन पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह बिल्डिंग होटल की तरह लग रही है। उन्होंने याद दिलाया कि मौजूदा संसद को 64 योगिनी मंदिर की डिजाइन के आधार पर तैयार किया गया है। यह गोलाकार है, जबकि नया भवन त्रिकोण की शक्ल में है। अब यह देखना होगा कि सरकार ने जो ठेका दिया है उसमें बिल्डिंग की डिजाइन बदली गई है या नहीं, सेंट्रल हॉल की व्यवस्था है या नहीं और प्रेस गैलेरी को किस तरह से डिजाइन किया गया है।

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