चंपत राय ने मंदिर पर ठिक कहा

चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के महासचिव हैं। उनका कद या हैसियत अशोक सिंघल या प्रवीण तोगड़िया किस्म की तो नहीं है पर वे विहिप के सबसे शीर्ष नेताओं में हैं और समझदारी की बातें करते हैं। उन्होंने तमाम हिंदुवादी संगठनों और एक पार्टी के नाते भाजपा की ओर से अल्पसंख्यकों और कांग्रेस पार्टी को लेकर बनाए जाने वाले नैरेटिव से अलग हट कर कई ऐसी बातें कही हैं, जो चौंकाने वाली हैं। उन्होंने अयोध्या में बनने वाले राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर कहा कि जो लोग इसका विरोध कर रहे है वे भी देशभक्त हैं, उन्हें देश विरोधी नहीं कहा जा सकता है। चंपत राय ने कहा कि इसका विरोध करने के लोगों के अपने अपने कारण रहे होंगे पर वे भी देशभक्त हैं।

सोचें, ऐसे समय में जब सरकार के किसी फैसले तक का विरोध करने वाले को देशद्रोही ठहराया जाता है, तब विहिप के महासचिव ने कहा कि मंदिर का विरोध करने वाले भी देशभक्त हैं, उनके अपने कारण होंगे विरोध करने के। उन्होंने देश की गंगा-जमुनी तहजीब की बात की और कहा कि रहीम व रसखान भारतीय परंपरा के कवि हैं और अतीत में किसी ने राम को इमाम ए हिंद कहा था, जिसका मतलब यह है कि राम सबके हैं। चंपत राय ने कहा कि देश में बदलाव नेहरू के समय में ही शुरू हो गया था। उन्होंने ब्रिटिश मूर्तियां हटवाईं, इंदिरा गांधी ने भी बदलाव किए और आज भी बदलाव जारी हैं। सबसे कट्टर हिंदुवादी संगठन के सबसे बड़े नेताओं में से एक चंपत राय की बातें भाजपा नेताओं को सुननी चाहिए।

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