जेएनयू का नाम बदलने की मांग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस दिन से दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के कैंपस में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण किया और भाषण दिया उसी दिन से भाजपा के नेता और हिंदुत्व के विचारक इस बात की मांग करने लगे हैं कि विश्वविद्यालय का नाम बदल कर स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय कर दिया जाए। छुटभैया नेताओं के साथ साथ भाजपा के बड़े नेता और हाल ही में महासचिव बनाए गए सीटी रवि ने यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की मांग की है। गौरतलब है कि सीटी रवि कर्नाटक सरकार में मंत्री थे। राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। जेपी नड्डा ने उनको तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गोवा जैसे तीन राज्यों का प्रभारी बनाया है। वे चाहते हैं कि जेएनयू का नाम बदल कर विवेकानंद के नाम पर कर दिया जाए।

हालांकि सीटी रवि या दूसरा कोई भी जो व्यक्ति इसकी मांग कर रहा है उसके पास इसका कोई तर्क नहीं है कि जेएनयू का नाम क्यों बदल दिया जाए? स्वामी विवेकानंद के नाम पर क्यों नहीं उससे बड़ा और बढ़िया संस्थान खोल दिया जाए? सरकार स्वामी विवेकानंद के नाम पर एक हजार एकड़ में उच्च शिक्षा का संस्थान क्यों नहीं खोल रही है? साढ़े छह साल से केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार है। लेकिन सरकार ने किसी बड़ी शिक्षण संस्थान का निर्माण नहीं कराया है। हालांकि इस बीच देश भर में कुकुरमुत्ते की तरह दर्जनों निजी यूनिवर्सिटी खुल गई हैं, जिन्हें थोक के भाव सरकार ने इंस्टीच्यूट ऑफ इमिनेंस का दर्जा दिया है। असल में सरकार का इरादा अपनी तरफ से कोई बड़ी लकीर खींचने का नहीं है, वह पहले से खींची बड़ी लकीर मिटाने का काम में लगी हुई है।

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