changed bjps strategy election बदली भाजपा की रणनीति
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बदली भाजपा की रणनीति

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गुजरात में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को बदले जाने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। असली कारण किसी को पता नहीं है। सब कयास लगा रहे हैं। कोई हटाए जाने के पांच कारण बता रहा है तो कोई आठ कारण बता रहा है। लेकिन असली कारण यह है कि लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने कहीं भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। उसी से पार्टी ने सबक लेकर रणनीति बदली है और चुनावों से पहले मुख्यमंत्री बदलना शुरू किया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हारी थी लेकिन इन तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार नरेंद्र मोदी और अमित शाह के केंद्र में आने से पहले बनी थी। changed bjps strategy election

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लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा के उन राज्यों में हारने या कमजोर होने का सिलसिला शुरू हुआ, जहां मोदी और शाह ने भाजपा की सरकार बनवाई थी। लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद भाजपा शासित तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे और तीनों में पार्टी का प्रदर्शन खराब हो गया। महाराष्ट्र और झारखंड में तो भाजपा चुनाव हार कर सत्ता से बाहर हो गई। हरियाणा में जरूर भाजपा की सरकार बच गई, लेकिन उसकी सीटें काफी कम हो गईं और उसे दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी से तालमेल करके सरकार बनानी पड़ी। यह इस बात का संकेत था कि पांच साल सरकार चलाने वाले पार्टी के मुख्यमंत्री अपने कामकाज पर दोबारा सत्ता में लाने में सक्षम नहीं हैं।

भाजपा को इसका संकेत गुजरात के चुनाव में भी मिला था, जहां 2018 के चुनाव में पार्टी बड़ी मुश्किल से बहुमत के आंकड़े को पार कर पाई थी। लेकिन वहां हालात अलग थे। वहां चुनाव से एक साल पहले ही मुख्यमंत्री बदला गया था और दूसरे 16 साल के बाद पहला चुनाव था, जो नरेंद्र मोदी के बिना लड़ा जा रहा था। इसलिए उस चुनाव के नतीजे को रणनीति बदलने के साथ नहीं जोड़ा सकता है। महाराष्ट्र का चुनाव भी भाजपा ने अपने सहयोगी के साथ मिल कर जीत ही लिया था लेकिन बाद में शिव सेना ने उसे छोड़ दिया तो भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। इस लिहाज से कह सकते हैं कि झारखंड का चुनाव नतीजा, टर्निंग प्वाइंट है। वह पहला राज्य था, जहां पांच साल डबल इंजन की सरकार चलने के बाद भाजपा की निर्णायक हार हुई थी।

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उसके बाद ही पार्टी ने रणनीति बदली है और राज्यों से जमीनी स्तर की फीडबैक मंगा कर मुख्यमंत्री बदलने की योजना बनी है। उत्तराखंड में इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री बदल गया था और अब गुजरात में भी इसी वजह से सीएम बदला गया है। कर्नाटक में भी भाजपा ने 2023 के चुनाव को ध्यान में रख कर ही मुख्यमंत्री बदला है। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश को लेकर जो नाटक चला वह भी इसी का नतीजा था। वहां भाजपा आलाकमान मुख्यमंत्री नहीं बदल सका तो राज्य सरकार के कामकाज से प्रधानमंत्री के नाराज होने की खबरों का प्रचार हुआ ताकि एंटी इन्कंबैंसी कम की जा सके। अगर भाजपा इस रणनीति पर आगे भी अमल करती है तो 2022 और 2023 में जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं वहां के मुख्यमंत्री बदले जा सकते हैं।

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