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रमन सिंह को मना कर दिया पर सिंधिया को नहीं!

भारतीय जनता पार्टी में अलग अलग नेताओं के लिए अलग तरह के नियम काम करते हैं। नेता की हैसियत और उसकी क्षमता को देख कर उसके बारे में फैसला किया जाता है। रमन सिंह और वसुंधरा राजे एक ही समय 2003 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। रमन सिंह छत्तीसगढ़ के और वसुंधरा राजस्थान की मुख्यमंत्री बनी थीं। रमन सिंह लगातार 15 साल मुख्यमंत्री रहे, जबकि वसुंधरा राजे 2008 में चुनाव हार गईं। उन्होंने फिर 2013 में वापसी की लेकिन 2018 में फिर हार गईं। इस तरह वे दो बार में 10 साल मुख्यमंत्री रहीं। पार्टी आलाकमान से उनसे संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं। इसके बावजूद पार्टी की नजर में उनकी हैसियत रमन सिंह से ज्यादा बड़ी है।

असल में पिछले दिनों रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ की यात्रा करने की योजना बनाई। अगले साल होने वाले चुनाव की तैयारी के सिलसिले में उन्होंने यह कार्यक्रम बनाया था। वे एक बार फिर अपनी दावेदारी पेश करने की योजना बना रहे थे लेकिन पार्टी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने उनको यात्रा करने से मना कर दिया। बाद में रमन सिंह ने कुछ पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में इस पर नाराजगी भी जताई। वे इस बात से भी नाराज हैं कि उनके बेटे अभिषेक को पिछली बार लोकसभा की टिकट नहीं दी गई थी। दूसरी ओर वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत को टिकट भी मिली और पिछले दिनों उन्होंने अपनी रैलियां और प्रदर्शन की योजना बनाई तो किसी ने उनको नहीं रोका। उलटे पार्टी के प्रभारी अरुण सिंह ने कहा कि वे सभा और रैली करती हैं तो यह अच्छी बात है क्योंकि इससे पार्टी को फायदा होगा। सोचें, दो नेताओं के कार्यक्रमों को लेकर कैसा दोहरा रवैया है!

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