टीएस सिंहदेव की मंशा पूरी नहीं होगी

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छत्तीसगढ़ में नंबर दो मंत्री टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद कर रहे थे। जानकार सूत्रों का कहना है कि नवंबर-दिसंबर 2018 में जब राज्य में कांग्रेस को दो-तिहाई बहुमत मिला था तब भूपेश बघेल के साथ साथ सिंहदेव भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे और उस समय उनसे वादा किया गया था कि पहले ढाई साल बघेल मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद उनको सत्ता सौंप दी जाएगी। यानी आधे आधे कार्यकाल की बात हुई थी। इस लिहाज से भूपेश बघेल का ढाई साल का कार्यकाल अगले महीने मई में पूरा हो रहा है। पर ऐसा लग नहीं रहा है कि उनको हटाया जाएगा और या राज्य में कोई बदलाव होगा। अब राज्य की सत्ता उन्हीं के हाथ में रहने वाली है।

कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि बघेल एक छोटे से आदिवासी बहुल राज्य के मुख्यमंत्री थे लेकिन असम के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जैसा काम किया है उसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर का बड़ा नेता बना दिया है। ध्यान रहे असम में कांग्रेस को चुनाव बघेल ने लड़वाया। साधन भी लगाए और कार्यकर्ता भी दिया। उन्होंने गांव-गांव शिविर लगवाने और अपने लोगों को बैठा कर स्थानीय लोगों को प्रभावित करने की वह रणनीति अपनाई, जिसके दम पर कांग्रेस छत्तीसगढ़ में जीती थी। उनकी मेहनत ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके करीबी जितेंद्र सिंह को बहुत प्रभावित किया है। ध्यान रहे जितेंद्र सिंह असम के प्रभारी हैं। असम के चुनाव के अलावा कोरोना वायरस की महामारी ने भी भूपेश बघेल को राहत दिलाई है। राज्य में कोरोना के केसेज तेजी से फैल रहे हैं और इस बीच बघेल ने सभी नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन लगवाने का ऐलान किया है। इसके बीच में मुख्यमंत्री नहीं बदला जा सकता है।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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