चीनी फोन का बाजार बम बम

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध चल रहा है। जून में जिस दिन गलवान घाटी में भारत के 20 जवान शहीद हुए उसके बाद देशभक्ति उफान मार रही है। पर देशभक्ति दिखाने के लिए सरकार ने सिर्फ इतना किया कि टिकटॉक और इसी किस्म के कुछ ऐप्प प्रतिबंधित कर दिए। देश और दुनिया के तमाम सामरिक जानकार चाहते हैं कि भारत के साथ पंगा शुरू करने के लिए चीन को भारत बड़ा आर्थिक झटका दे। ऐसा फैसला करे, जिसका आर्थिक असर चीन पर महसूस हो। उसे लगे कि भारत के साथ पंगा बढ़ाने की उसे बड़ी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी है। परंतु सरकार यह नहीं कर रही है। देश के लोगों की देशभक्ति भी सिर्फ सोशल मीडिया पर ही दिख रही है बाकी उनका चीन विरोध भी चीनी मोबाइल हैंडसेट के सहारे ही चल रहा है। चीन के बने हैंडसेट के प्रति भारतीयों का मोह ऐसा है कि चीनी हैंडसेट का बाजार बम बम है।

पिछले महीने भारत में अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के कुछ संकेत मिले। यह संकेत ऑटोमोबाइल और मोबाइल सेक्टर में तेजी से दिखा है। सितंबर के महीने में भारत में पांच करोड़ मोबाइल हैंडसेट बिके हैं, जिसमें तीन करोड़ 80 लाख चाइनीज हैंडसेट हैं और एक करोड़ हैंडसेट दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग का है। सोचें, भारत के 76 फीसदी मोबाइल हैंडसेट बाजार पर चीन का कब्जा है। अकेले शाओमी का कब्जा 26 फीसदी बाजार पर है। इसके अलावा वीवो, रियल मी और ओप्पो के हिस्सा में 50 फीसदी बाजार है। सोचें, भारत में कुछ समय पहले तक माइक्रोमैक्स, कार्बन, लावा जैसी कंपनियां हैंडसेट बना रही थीं और उनका बाजार तेजी से बढ़ रहा था। लेकिन जब से मेक इन इंडिया की मुहिम शुरू हुई तब से भारतीय कंपनियां बंद हो गईं और चीनी कंपनियों का कब्जा हो गया। टिकटॉर बैन करने वाली सरकार को इसमें कुछ भी गलत नहीं दिख रहा है और देशभक्ति से लबालब भरे नागरिकों को भी चीन का विरोध करना है पर चीन के हैंडसेट का नहीं करना है। अभी उसी हैंडसेट से दिवाली के लिए छोटे छोटे कारोबारियों द्वारा मंगाई गई चाइनीज झालरों का विरोध शुरू होगा।

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