चीन के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिलेगी


पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी पर चीन के साथ गतिरोध शुरू होने और पिछले साल जून में भारतीय सैनिकों के साथ हिंसक झड़प के बाद भारत ने चीन को आर्थिक झटका देने के लिए कुछ बेबी स्टेप्स उठाए थे। भारत ने कुछ चाइनीज ऐप बंद किए थे और यह नियम बनाया था कि पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश प्रस्तावों को एक कमेटी मंजूरी देगी। इसका मकसद यह था कि स्वाभाविक रूट से होने वाले चीन के निवेश को अटकाया जाए। लेकिन अब खबर है कि भारत जल्दी ही चीन के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने जा रहा है। इसमें कुछ निवेश प्रस्ताव बड़े हैं।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने कई मंत्रालयों की एक समन्वय समिति बनाई है, जो निवेश प्रस्तावों का आकलन करके उसे मंजूरी देती है। यह एफआईपीबी से अलग है। इस कमेटी के सामने चीन के निवेश के कई प्रस्ताव हैं। हालांकि पिछले एक साल में संस्थागत निवेशकों के जरिए होने वाला चीनी निवेश एक तिहाई रह गया है। लेकिन अब उसके कुछ बड़े निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है। तभी सवाल है कि क्या एलएसी पर से चीनी सैनिकों की वापसी का इससे कोई संबंध है? क्या चीन ने अपने सैनिकों को पीछे हटाने पर इसलिए हामी भरी ताकि भारत के साथ उसका आर्थिक कारोबार फिर से तेजी से आगे बढ़े? गौरतलब है कि पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी दोनों सिरों से चीन की सेना पीछे हट गई है और दसवें दौर की वार्ता के बाद गोगरा हॉट स्प्रिंग से भी चीनी सैनिकों की वापसी महज वक्त की बात है।


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