चिराग से बात क्यों नहीं की किसी नेता ने?

यह हैरानी की बात है लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान अपने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बता रहे हैं, भाजपा के साथ दिल का रिश्ता बता रहे हैं, चुनाव में जदयू को हरवा कर भाजपा के साथ सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं और भाजपा का कोई नेता उनसे निजी तौर पर बात नहीं कर रहा है? वे कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने उन्हें अकेले लड़ने से मना नहीं किया इसलिए वे अकेले लड़ रहे हैं। इसके बावजूद भाजपा के किसी नेता ने चिराग से बात करने और उन्हें चुनाव नहीं लड़ने के लिए मनाने की पहल नहीं की। भाजपा नेताओं ने बिहार में लोजपा को जरूर एनडीए से बाहर कर दिया पर राष्ट्रीय स्तर पर लोजपा अब भी एनडीए में बनी हुई है।

बिहार में तीनों चरण के मतदान के लिए अब नामांकन खत्म होने वाले हैं। सो, इसके बाद अगर कोई नेता चिराग से बात भी करता है तब भी कोई असर नहीं होगा क्योंकि उम्मीदवारों की नाम वापसी का समय खत्म हो जाने के बाद पार्टी लड़ाई से बाहर नहीं हो सकती है और कंफ्यूजन बना रहेगा। तभी जदयू के नेता मान रहे हैं कि अगर लोजपा के चुनाव लड़ने के पीछे भाजपा का खेल नहीं होता तो भाजपा के शीर्ष नेता एक बार बुला कर चिराग को लड़ने से मना कर देते। या उन्हें एनडीए का हिस्सा बना लेते। पर भाजपा की ओर से ऐसा नहीं किया गया। भाजपा की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष की औपचारिक वार्ता जरूर हुई पर शीर्ष स्तर से चिराग को मनाने या समझाने की पहल नहीं की गई।

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