राजनीति

जवाबदेही केजरीवाल की, अधिकार बैजल के

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की बात करते करते भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार इसका अर्धराज्य का दर्जा भी खत्म कर दिया। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिल्ली की चुनी हुई सरकार के सारे अधिकार लेकर उप राज्यपाल को दे दिए। मार्च में संसद से पास हुए एनसीटी कानून को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचित कर दिया है, जिसके बाद अब दिल्ली सरकार का मतलब उप राज्यपाल होगा। इसका मतलब यह है कि अब जवाबदेही सारी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की होगी और अधिकार सारे उप राज्यपाल अनिल बैजल के पास होंगे।

तकनीकी या राजनीतिक रूप से उप राज्यपाल की जवाबदेही कोई नहीं होगी, लेकिन अधिकार सारे उसके पास होंगे। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि दिल्ली में एक चुनी हुई सरकार है। जिस केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा और चुनी हुई सरकार नहीं होती है वहां उप राज्यपाल या प्रशासक के पास सारे अधिकार होते हैं तो सारी जवाबदेही भी उसकी होती है। लेकिन अब दिल्ली की स्थिति अनोखी हो गई है। दिल्ली में विधानसभा भी है और प्रचंड बहुमत से चुनी हुई सरकार भी, इसलिए लोगों के प्रति उसकी जवाबदेही बनती है पर उसके पास कोई अधिकार नहीं होगा। अधिकार सारे उप राज्यपाल के पास होंगे।

उप राज्यपाल की कोई जवाबदेही इसलिए नहीं है क्योंकि किसी तरह की नीतिगत पहल नहीं करनी है। पहल सारी दिल्ली सरकार को करनी है लेकिन उसकी मंजूरी उप राज्यपाल कार्यालय से मिलेगी। जैसे दिल्ली सरकार अगर दिल्ली के लोगों के लिए कुछ करने का कानून बनाना चाहती है तो उसके लिए 15 दिन पहले उसे उप राज्यपाल से मंजूरी लेनी होगी। जैसे दिल्ली सरकार को कोई प्रशासनिक फैसला करना है तो सात दिन पहले उसकी फाइल मंजूरी के लिए उप राज्यपाल को भेजनी होगी। जैसे दिल्ली सरकार को अपने किसी कार्यालय के लिए बोतलबंद पानी खरीदना है या स्टेशनरी आदि खरीदनी है तो उसकी फाइल सात दिन पहले उप राज्यपाल के यहां से मंजूर करानी होगी।

इस कानून में यह कहीं नहीं लिखा गया है कि उप राज्यपाल, मुख्यमंत्री के रूप में काम करेंगे। यह भी नहीं लिखा गया है कि दिल्ली के लोगों के लिए लोक कल्याणकारी फैसला करने का काम उप राज्यपाल करेंगे। उन्हें कुछ नहीं करना है। उन्हें दिल्ली सरकार जो फैसले करेगी उसे मंजूर करना है या खारिज करना है या लंबित रखना है। अगर उन्हें लगता है कि राज्य सरकार कोई लोक लुभावन फैसला कर रही है, जिसका उसे राजनीतिक लाभ मिल सकता है तो तय मानें कि ऐसे फैसले अब दिल्ली में नहीं लागू होंगे। राज्यपाल फैसला खारिज करें या लंबित रखें, दोनों स्थितियों में लोगों की नाराजगी दिल्ली की चुनी हुई सरकार और सत्तारूढ़ दल को झेलनी है। उप राज्यपाल से नाराज होकर लोग क्या कर लेंगे? सोचें, कोरोना की वजह से विधायक निधि बंद है और अब राज्य सरकार भी बिना उप राज्यपाल की मंजूरी के कुछ नहीं कर सकेगी तो फिर विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री क्या करेंगे? लोग तो उनसे सवाल पूछेंगे!

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अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस : भारत के योग से पूरा विश्व हो रहा है प्रकाशवान, न्‍यूयॉर्क के टाइम्‍स स्‍क्‍वायर पर भी दिखा गजब का नजारा..

न्‍यूयॉर्क | आज पूरे देश में अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. योग अब सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि पूरे विश्व में योग का प्रकाश फैल गया है. अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के 7 वर्ष पूरे हने पर आज न्‍यूयॉर्क के टाइम्‍स स्‍क्‍वायर पर भी खासा रौनक देखने को मिली. मौके पर 300 से ज्यादा लोगों ने जमा होकर योग अभ्यास किया और एक दूसरे के स्वस्थ्य रहने की कामना की. योग करने पहुंचे लोग अपने साथ अपना मैट लेकर शामिल हुए थे. आज सुबह की शुरूआत यहां रहने वाले लोगों के लिए खास थी. लोग सुबह से ही टाइम्‍स स्‍क्‍वायर के पास जमा होने शुरू हो गये थे. बताया जा रहा है कि कई दिनों पहले से इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां की जा रही थी. टाइम्‍स स्‍क्‍वायर अलाइंस द्वारा इसके आयोजन की सारी तैयारियां की गई थी.

शुरु भारत से लेकिन पूरा विश्व हो रहा है प्रकाशवान

लोगों की संख्या देखकर काउंसलेट जनरल ऑफ इंडिया ने कहा कि आज हम जैसे टाइम्‍स स्‍क्‍वायर पर योग दिवस को मना रहे हैं. उन्होंने बताया कि योग के प्रकाश अब दुनिया के सभी देशों में फैल गया है. उन्होंने लोगों को बताया कि इसमें कोई शक नहीं है कि योग की शुरु भारत से हुआ था लेकिन अब ये पूरे विश्व को प्रकाशवान कर रहा है. उन्होंने बताया कि योग हमारे तन मन की शांति और स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा है. और ये हमें सही तरह से जीवन जीना सिखाता है. उन्होंने कहा कि इससे केवल आध्यात्मिक शांति नहीं मिलती बल्कि इसे लगातार करने से हमें कई प्रकार की बीमारियों से भी मुक्ति मिलती है.

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लोगों ने कहा- एक अलग तरह अनुभव और उर्जा का संचार

टाइम्‍स स्‍क्‍वायर पर योग करना अपने एक अलग बात है. यहां आम दिनों में लोगों की संख्या इतनी होती है कि लोग आराम से चल भी नहीं सकते. यहां योग करने पहुंची भारतीय मूल की रुचिका लाल ने अपना अनुभवों को साधा करते हुए कहा कि टाइम्‍स स्‍क्‍वायर पर प्राणायाम, और मेडिटेशन करना एक गजब का अनुभव था. उन्होंने कहा कि ऐसा बहुत कम होता है कि आप ये समझ नहीं पाएं कि आप जो कर रहे हैं वो अजीब है लेकिन एक अच्छा अनुभव देने वाला है.

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