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Friday, May 14, 2021
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बंगाल में लेफ्ट की नीति से कांग्रेस नाराज

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कांग्रेस पार्टी और सीपीएम के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट मोर्चे की राजनीति कांग्रेस पार्टी को रास नहीं आ रही है और कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। असल में पश्चिम बंगाल में अब लेफ्ट मोर्चे की प्राथमिकता चुनाव जीतने या अच्छा प्रदर्शन करने की नहीं रह गई है। लेफ्ट मोर्चा अब इस कोशिश में है कि किसी तरह से ममता बनर्जी हारें। इसके लिए लेफ्ट मोर्चे ने अपने काडर को भाजपा की जीत के लिए काम करने में  लगाया है। कई जिलों में लेफ्ट मोर्चे के नेता और कार्यकर्ता भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।

लेफ्ट मोर्चे ने राज्य में चुनावी नारा भी दिया है कि इस बार राम वाली पार्टी को जिताना है तो अगली बार वाम की जीत होगी। 21 में रामे, 26 में वामे का नारा खूब चल रहा है। हालांकि यह वामपंथी पार्टियों की सदिच्छा है कि एक बार ममता हार गईं तो वे भाजपा को रोक लेंगे और अगले चुनाव में भाजपा को हरा देंगे। उनको यह भी लग रहा है कि हारने के बाद ममता की पार्टी बिखर जाएगी और लेफ्ट का जो काडर उनके साथ गया था वह लौट आएगा।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस इस राजनीति को पसंद नहीं कर रही है। कांग्रेस भी ममता के खिलाफ लड़ रही है पर उसकी राष्ट्रीय स्तर की लड़ाई भाजपा की है। और उसको पता है कि अगर भाजपा बंगाल में जीतती है तो राष्ट्रीय राजनीति पर इसका बड़ा असर होगा। कांग्रेस और उसके समर्थन वाली कई सरकारें खतरे में आ सकती हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने अपने काडर को अंदरखाने ममता की मदद के लिए लगाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और ममता के घोर विरोधी अधीर रंजन चौधरी के कोरोना संक्रमित होकर प्रचार से दूर हो जाने से भी कांग्रेस के लिए ममता की मदद करना आसान हो गया है। ऊपर से कांग्रेस के नेता केरल में भी लेफ्ट के हाथों हार की संभावना से आशंकित हैं। इसलिए भी नाराजगी बढ़ी है।

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साभार - ऐसे भी जाने सत्य

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