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कांग्रेसी की राज्यों में बदली रणनीति

Rahul gandhi

congress changed strategy in the states : कांग्रेस पार्टी प्रदेशों में अपने क्षत्रपों को एकछत्र राज देने की पिछले 20 साल से चली आ रही रणनीति को बदल रही है। कांग्रेस ने पहले भी इसका प्रयास किया था, लेकिन तब कामयाबी नहीं मिली थी और इस प्रयोग के चक्कर में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों प्रदेश हाथ से निकल गए थे। अब ज्यादा व्यवस्थित तरीके से कांग्रेस यह प्रयास कर रही है कि प्रदेशों में एक क्षत्रप के हाथ में सब कुछ सौंपने की बजाय दो या तीन प्रादेशिक क्षत्रप तैयार किए जाएं। राजीव गांधी के समय तक ऐसा ही होता था।

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कांग्रेस का बड़े से बड़ा नेता भी मुख्यमंत्री का पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता था। आजादी की लड़ाई में शामिल रही पीढ़ी के कुछ नेताओं को छोड़ दें तो पूरे देश में अपवाद के लिए ही कुछ नेता होंगे, जिन्होंने मुख्यमंत्री का अपना कार्यकाल पूरा किया होगा। बिहार में डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा जैसे क्षत्रप नेता तीन बार भले मुख्यमंत्री बने पर कार्यकाल एक बार भी पूरा नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी से लेकर वीपी सिंह तक कोई अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया।

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इसमें पहली बार बदलाव राजीव गांधी के निधन के बाद नब्बे के दशक में दिखा। ( congress changed strategy in the states ) दिग्विजय सिंह कांग्रेस के चुनाव हारने तक लगातार दस साल मुख्यमंत्री बने रहे। यह सोनिया गांधी की कृपा रही, जो असम में तरुण गोगोई 15 साल, दिल्ली में शीला दीक्षित 15 साल, हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा 10 साल मुख्यमंत्री बने रहे और फिर इन राज्यों में कांग्रेस का ऐसा भट्ठा बैठा है कि कांग्रेस के नेता सत्ता के लिए तरस गए। हालांकि कांग्रेस ने जहां ताश के पत्तों की तरह मुख्यमंत्री बदले, जैसे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड आदि में भी पार्टी की स्थिति कोई खास अच्छी नहीं है।

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बहरहाल, अब कांग्रेस इस रणनीति को बदल रही है। उसने प्रदेशों में क्षत्रप नेताओं और यहां तक की मुख्यमंत्रियों के भी हाथ बांधे हैं। उनको जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के दूसरे नेताओं को तरजीह दी जा रही है और नए नेताओं को आगे लाने का प्रयास हो रहा है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता है कि ये रणनीति कितनी कारगर होगी, लेकिन पुरानी रणनीति विफल हो चुकी है यह तय है।

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तभी कांग्रेस आलाकमान जोखिम लेने को तैयार है। कांग्रेस की नीतियों में हो रहे बदलाव का नतीजा है कि कई राज्यों में पार्टी के अंदर टकराव के हालात बने हैं। यह सब अनायास नहीं हो रहा है। पंजाब से लेकर छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड से लेकर केरल तक जो विवाद चल रहा है वह कांग्रेस का संक्रमण काल है। अगले कुछ दिनों में और घमासान देखने को मिलेगा और हो सकता है कि कुछ और पुराने क्षत्रप पार्टी छोड़ें। लेकिन कांग्रेस उसके लिए तैयार है।

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