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मणिपुर में कांग्रेस का संकट

Congress political crisis delhi

manipur congress : पूर्वोत्तर में कांग्रेस पार्टी का एकमात्र किला मणिपुर था, जो अब ढह रहा है। कांग्रेस ने 2017 में हुए चुनाव में 60 सदस्यों की विधानसभा में 28 सीटें जीती थीं। उसे सरकार बनाने के लिए सिर्फ तीन सीटों की जरूरत थी, जो कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता नहीं जुटा सके और 21 सीट जीतने वाली भाजपा ने अपनी सरकार बना ली।

Nagaland

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बाद में कांग्रेस के 11 विधायक पार्टी छोड़ कर चले गए। अभी कांग्रेस के पास 17 विधायक बचे हैं, जिसमें से चर्चा है कि आठ विधायक पाला बदल कर भाजपा में जा रहे हैं। manipur congress के प्रदेश अध्यक्ष गोविंददास कोंथौजम ने इस्तीफा दे दिया है। वे खुद विधायक हैं और खबर है कि वे सात विधायकों को साथ लेकर भाजपा में शामिल होने वाले हैं।

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कांग्रेस ने संकट प्रबंधन के लिए पार्टी के नेता भक्तचरण दास को मणिपुर भेजा है लेकिन लग नहीं रहा है कि कांग्रेस अपना किला बचा पाएगी। कांग्रेस के आठ विधायकों के जाने के बाद सिर्फ नौ विधायक उसके पास बचेंगे। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले पार्टी के विधायकों का इस तरह से पाला बदलना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस के लिए मुश्किल हालात हैं।

गौरतलब है कि राज्य में अगले साल के शुरू में हो चार अन्य राज्यों के साथ चुनाव होना है। इस समय विधायकों के पाला बदलने और प्रदेश अध्यक्ष के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस अधर में आएगी। कोई भी नया अध्यक्ष अगले छह महीने में किस तरह से पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करेगा?

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