सोनिया ने अपने नेताओं को ताकत दिखाई

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के अंदर बगावत का झंडा उठाने वाले नेताओं को अपनी ताकत दिखाई है। उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में कहा कि उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं है और सबको साथ मिल कर पार्टी को मजबूत करना चाहिए। वे राहुल गांधी की तरह गुस्सा नहीं हुईं और न डांट-फटकार वाली भाषा में बात किया। उन्होंने चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को क्षमा करने का भाव दिखाया। पर उसके दो दिन बाद उन्होंने देश के विपक्षी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई और यह सुनिश्चित किया कि जिनको बुलाया जाए, वे सब उसमें हिस्सा लें। सोमवार को कार्य समिति की बैठक हुई थी, जिससे पहले 23 नेताओं की चिट्ठी का मामला आया था और ऐसा कहा जाने लगा था कि कांग्रेस नेतृत्व की ऑथोरिटी को बड़ी चुनौती मिली है। इसके दो दिन बाद बुधवार को सोनिया गांधी ने कांग्रेस सहित विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ऑनलाइन बैठक बुलाई। कांग्रेस के चारों मुख्यमंत्री इसमें शामिल हुए और साथ ही कांग्रेस के सहयोग से मुख्यमंत्री बने उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन भी शामिल हुए। सबसे हैरानी की बात यह थी कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस बैठक में शामिल हुईं।

आमतौर पर ममता बनर्जी पिछले कुछ समय से कांग्रेस अध्यक्ष की बुलाई बैठकों में हिस्सा नहीं लेती थीं। कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों की करीबी से वे नाराज थीं और दूसरे उनको भाजपा और कांग्रेस दोनों से समान दूरी दिखानी थी। इसलिए वे ज्यादातर बैठकों में दूरी बनाती थीं। पर इस बार उन्होंने सोनिया गांधी के नेतृत्व को मजबूती देने के लिए इस बैठक में हिस्सा लिया। यह अलग बात है कि उनसे बात करके अहमद पटेल ने उनको बैठक में शामिल होने के लिए तैयार किया या प्रशांत किशोर ने उन्हें कुछ सुझाव दिया पर वे बैठक में शामिल हुईं। इसी तरह बैठक से पहले खबर आ रही थी कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। वे अपने कारणों से बैठक से दूर रहने वाले थे। पर अंत में वे भी बैठक में शामिल हुए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सद्भाव कांग्रेस के साथ है क्योंकि वे कांग्रेस के साथ साझा सरकार चला रहे हैं। सो, कांग्रेस के चार मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ तीन दूसरे मुख्यमंत्री सोनिया गांधी की बैठक में शामिल हुए। इसके कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले नेताओं को बहुत स्ट्रांग मैसेज गया होगा। उनको लग गया होगा कि विपक्ष का मतलब कांग्रेस पार्टी है और कांग्रेस का मतलब सोनिया गांधी हैं। इस बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं के बगावत का उफान थोड़ा कम होगा।

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