कांग्रेस का फैसला अटका है

कांग्रेस पार्टी संगठन का फैसला नहीं कर पा रही है। कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति होनी है। ऐसा लग रहा है कि दो राज्यों का चुनाव खत्म होने के बाद ही इस बारे में फैसला होगा। कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस दुविधा में है कि पहले प्रभारी बदलें और नया प्रभारी नियुक्त करें या पहले प्रदेश अध्यक्ष बनाएं उसके बाद प्रभारी की घोषणा की जाए। कम से कम दो राज्यों– दिल्ली और आंध्र प्रदेश को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की यह दुविधा है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कांग्रेस को अध्यक्ष नियुक्त करना है पर वहां दूसरा मामला है।

दिल्ली के प्रभारी महासचिव पीसी चाको को बदलाना जाना है। उनके साथ पिछली अध्यक्ष दिवंगत शीला दीक्षित का बड़ा विवाद चला। बाद में पार्टी के कई नेताओं ने खुल कर चाको के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस की। चाको का कहना है कि नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त हो जाएगा तो वे हट जाएंगे और नया प्रभारी नियुक्त किया जाएगा। दूसरी ओर पार्टी के नेता चाहते हैं कि पहले प्रभारी बदला जाए और उसके बाद अध्यक्ष नियुक्त हो। भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति आजाद का नाम प्रदेश अध्यक्ष के लिए चर्चा में था पर प्रदेश नेताओं के विरोध की वजह से उनकी नियुक्ति अटक गई है।

उधर ऐसा ही मामला आंध्र प्रदेश में है। वहां के प्रदेश अध्यक्ष एन रघुवीरा रेड्डी ने इस्तीफा दिया हुआ है। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी वहां के प्रभारी हैं। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने भी पद छोड़ने की इच्छा जताई। पर कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि पहले रघुवीरा रेड्डी की जगह नया अध्यक्ष बनाएं या चांडी की जगह नया प्रभारी बनाएं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्री और उनके विरोधी खेमे की खींचतान में अध्यक्ष की नियुक्ति अटकी है।

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