कांग्रेस के कारण भाजपा की उम्मीद

दिल्ली में मतदान खत्म होने के बाद एक्जिट पोल के अनुमान आ गए हैं। सट्टा बाजार में तो सीटों का अनुमान हर दिन ऊपर-नीचे होता रहा है। पर कुल मिला कर इन दोनों का आकलन आम आदमी पार्टी की जीत और फिर से अरविंद केजरीवाल की सरकार बनने का है। आमतौर पर ये अनुमान सही साबित होते हैं। सीटों की संख्या के मामले में भले थोड़ा बहुत ऊपर नीचे हो पर इनकी दिशा सही होती है। एकाध अपवादों को छोड़ दें तो एक्जिट पोल और सट्टा बाजार हमेशा और सही साबित होते हैं।

बहरहाल, नतीजों का कुछ अंदाजा दिल्ली में चुनाव प्रचार और मतदान के रुख से अपने आप भी हो गया है। बहुत सहज समझदारी से कहा जा सकता है कि असली लड़ाई उन्हीं सीटों पर है, जहां कांग्रेस बहुत दमखम से लड़ रही है। ऐसी सीटों की संख्या 15 से 20 है। इन्हीं में कांग्रेस भी खाता खुलने की उम्मीद कर रही है और भाजपा को भी लग रहा है कि उसे सीटें मिलेंगी। कांग्रेस के मजबूती से लड़ रहे उम्मीदवारों में दो ऐसे हैं, जो पिछली बार आप की टिकट से जीते थे। चांदनी चौक सीट से अलका लांबा और द्वारका सीट से आदर्श शास्त्री मौजूदा विधायक हैं और इस बार आप की बजाय कांग्रेस से लड़ रहे हैं। ये दोनों बहुत मजबूत मुकाबले में हैं।

इनके अलावा कांग्रेस के हारून युसूफ बल्लीमारान में, चौधरी मतीन अहमद सीलमपुर में, अरविंदर सिंह लवली गांधी नगर, जगदीश यादव बादली में मजबूती से लड़े हैं। ओखला और शाहदरा में भी कांग्रेस के मजबूती से लड़ने की खबर है। जिन सीटों पर कांग्रेस मजबूती से नहीं लड़ रही है उन सीटों पर भाजपा के लिए बहुत मुश्किल दिख रही है। ऐसी सीटों की संख्या 50 से 55 है, जिन पर कांग्रेस पार्टी की जमानत जब्त हो सकती है। पिछली बार चुनाव लड़ी कांग्रेस की एक उम्मीदवार ने एक सर्वेक्षण एजेंसी से अपने लिए एक नई सीट पर सर्वेक्षण कराया था, जिसका अनुमान यह था कि सारी प्रयासों के बावजूद उस सीट पर उन्हें चार फीसदी से ज्यादा वोट नही मिलेंगे, जिसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ने का इरादा छोड़ दिया। आमतौर पर कांग्रेस को चार-पांच फीसदी वोट मिलने का ही अनुमान है पर 15-20 सीटों पर उनकी लड़ाई के कारण भाजपा की उम्मीदें बंधी हैं।

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