कांग्रेस के नए नेता निशाने पर

बिहार विधानसभा के चुनाव और 11 राज्यों की 56 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद कांग्रेस के नए नेता खासतौर से राहुल गांधी के करीबी, एक बार फिर निशाने पर हैं। इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं, जिनके सक्रिय राजनीति में आने और उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनने के बाद से लगातार यूपी में पार्टी की हालत बिगड़ती जा रही है। तमाम किस्म के राजनीतिक, सामाजिक आंदोलनों के बावजूद पार्टी का ग्राफ गिर रहा है। उत्तर प्रदेश में सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे, जिनमें से छह पर कांग्रेस लड़ी थी। इसी चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस की पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने पार्टी छोड़ी। कांग्रेस इनमें से किसी भी सीट पर दूसरे स्थान पर भी नहीं आ सकी। लोकसभा चुनाव में भी प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस लड़ी तो उसकी सीटें दो से घट कर एक रह गई। राहुल गांधी चुनाव हार गए।

इसी तरह से राहुल गांधी के बेहद करीबी नेता हैं युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे राजीव सातव। तमाम बड़े नेताओं को दरकिनार कर राहुल गांधी ने उनको राज्यसभा में भेजा है और गुजरात का प्रभारी बनाया है। गुजरात में आठ सीटों पर उपचुनाव हुए, जिसमें सातव और उनके साथ साथ राहुल की युवा टीम- अमित चावड़ा, परेश धनानी और हार्दिक पटेल ने खूब मेहनत की पर कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। 2017 के चुनाव में ये सारी सीटें कांग्रेस ने जीती थी और पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव के समय कांग्रेस के विधायक इस्तीफा देकर भाजपा में चले गए थे। इस तरह अपनी ही जीती सीटों में से एक भी सीट कांग्रेस वापस नहीं हासिल कर पाई।

बिहार विधानसभा में चुनाव लड़ाने का जिम्मा प्रभारी महासचिव शक्ति सिंह गोहिल का था। लेकिन उनके साथ साथ राहुल गांधी के पसंदीदा नेता और महासचिव रणदीप सुरजेवाला को चुनाव प्रबंधन समिति का प्रमुख बना कर भेजा गया था। वे एक महीने तक वहां डेरा डाले रहे थे। उनके साथ मीडिया कोऑर्डिनेशन का काम देखने के लिए पवन खेड़ा भी पटना में ही थे। लेकिन वहां भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। पिछली बार कांग्रेस 43 सीटों पर लड़ कर 27 जीती थी और इस बार 70 सीटों पर लड़ कर सिर्फ 19 जीत पाई।

हरियाणा में एक सीट पर उपचुनाव था, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पसंद के उम्मीदवार की टिकट काट कर सुरजेवाला की पसंद के उम्मीदवार को टिकट दी गई और उसके बाद सुरजेवाला बिहार जाकर बैठ गए। इसके बावजूद हुड्डा ने हरियाणा में उपचुनाव वाली एक सीट कांग्रेस को दिला दी। एकाध अपवादों को छोड़ कर ऐसा लग रहा है कि पार्टी के पुराने नेता ही कारगर हो रहे हैं।

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