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चार राज्यों में कांग्रेस ही मुकाबला में!

One opinion of G 23

अभी से लेकर लोकसभा चुनाव तक जितने भी विधानसभा के चुनाव होने हैं उनमें एक उत्तर प्रदेश को छोड़ कर हर राज्य में कांग्रेस और भाजपा को आमने-सामने लड़ना है। एक उत्तर प्रदेश को छोड़ कर बाकी सभी राज्यों में कांग्रेस या तो सरकार में है या मुख्य विपक्षी पार्टी है। लोकसभा चुनाव तक जितने भी राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं उन राज्यों में प्रादेशिक पार्टियां या तो नहीं हैं या बहुत मामूली हैसियत रखती हैं। कांग्रेस की जगह लेने के लिए हाथ पैर मार रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की भी कोई खास हैसियत इन राज्यों में नहीं है।

अभी पांच राज्यों के चुनावों की घोषणा हुई है, जिसमें उत्तर प्रदेश में कांग्रेस हाशिए की पार्टी है। लेकिन पंजाब में कांग्रेस की सरकार है और उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में वह मुख्य विपक्षी पार्टी है। जिस तरह से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस हाशिए की पार्टी है उसी तरह पंजाब में भाजपा हाशिए की पार्टी है और तमाम प्रयासों के बावजूद भाजपा को अभी राज्य में पैर जमाने की जगह नहीं मिल पाई है। यह जरूर है कि कांग्रेस से खुन्नस की वजह से कैप्टेन अमरिंदर सिंह अपनी राजनीतिक जमा-पूंजी और अपना व अपने परिवार का बचा-खुचा राजनीतिक भविष्य गंवा कर भाजपा को मजबूत करने में लगे हैं लेकिन कामयाबी मिलनी मुश्किल है।

जहां तक गोवा और मणिपुर की बात है तो इन दोनों राज्यों में पिछले चुनाव में कांग्रेस जीती थी। गोवा में तो भाजपा बुरी तरह से हारी थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में 21 सीट जीत कर पूर्ण बहुमत की सरकार पांच साल चलाने के बाद भारतीय जनता पार्टी 2017 के चुनाव में राज्य में सिर्फ 12 सीट जीत पाई थी। और 2012 के चुनाव में नौ सीट जीतने वाली कांग्रेस ने 17 सीटें जीती थीं। यानी भाजपा की सीट आधी हुई थी और कांग्रेस की दोगुनी। फिर भी भाजपा की जोड़-तोड़ के आगे कांग्रेस नहीं टिक सकी और हारी हुई भाजपा ने सरकार बना ली।

मणिपुर में जरूर भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था फिर भी उसकी सीटें कांग्रेस से बहुत कम थी। कांग्रेस हार कर भी बहुमत के पास पहुंच गई थी। उसे 60 सदस्यों की विधानसभा में 28 सीटें मिली थीं लेकिन 21 सीट जीतने वाली भाजपा ने वहां भी जोर-जबरदस्ती सरकार बना ली और उसके बाद से लगातार कांग्रेस पार्टी को तोड़ती रही। पांच साल पहले के चुनाव में भाजपा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जीती थी, पंजाब और गोवा में बुरी तरह हारी थी और मणिपुर में भी बहुमत से बहुत पीछे रह गई थी। दूसरी ओर कांग्रेस उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हारी थी और पंजाब, गोवा और मणिपुर में जीती थी।

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