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उत्तराखंड में कांग्रेस खुद नुकसान कर रही है

Inflation free India Congress

ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी चुनाव लड़ने के सारे पारंपरिक और स्थापित तरीके भूल चुकी है। अन्यथा कोई कारण नहीं था कि उत्तराखंड में टिकटों की घोषणा के बाद इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की अदला-बदली हो। कांग्रेस में टिकट बंटवारे का एक सिस्टम रहा है, जिसे सारी पार्टियां फॉलो करती हैं। इसके मुताबिक प्रदेश के नेता, प्रभारी और छंटनी समिति के सदस्य मिल कर उम्मीदवारों की एक लंबी सूची बनाते हैं। अंत में हर सीट के लिए तीन-तीन उम्मीदवारों के नाम केंद्रीय चुनाव समिति को भेजी जाती है और वहां एक नाम तय होता है। इतने फिल्टर के बाद भी इस बार उत्तराखंड में कांग्रेस को आधा दर्जन सीटों पर उम्मीदवार बदलने पड़े, जिनमें एक सीट हरीश रावत की भी है।

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हरीश रावत अपनी हरिद्वार और किच्छा सीट छोड़ कर रामनगर लड़ने गए और बाद में वह भी छोड़ कर अब लालकुआं से लड़ रहे हैं। उन्होंने रामनगर के उम्मीदवार रंजीत रावत की टिकट कटवा कर उनको साल्ट भेज दिया और अब रामनगर सीट पर महेंदर पाल सिंह को टिकट दिया। महेंदर पाल को पहले कालाडुंगी से टिकट दिया गया था। अब उस सीट पर महेश शर्मा को भेजा गया है। डोईवाला सीट पर महेश उनियाल को दी थी फिर उनकी टिकट काट कर गौरव चौधरी को दिया है। हरीश रावत की जिद पर उनकी बेटी को हरिद्वार ग्रामीण सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। इस तरह से टिकट काट-छांट करके कांग्रेस अपना नुकसान कर  रही है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने ऐसे अनाप-शनाप तरीके से उम्मीदवार नाम की घोषणा के बाद पार्टी छोड़ कर चले गए और उनकी जगह दो नए उम्मीदवारों की घोषणा करनी पड़ी।

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