कमलनाथ ने पहले क्यों नहीं काम किए?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ आखिर किस बात का इंतजार कर रहे थे, जो अब आनन-फानन में इतने काम कर रहे हैं? उनको राज्य का मुख्यमंत्री बने 16 महीने हो गए और अब जाकर उन्होंने वैधानिक पदों पर नियुक्ति वगैरह शुरू की है। उन्होंने अब जाकर तीन नए जिले बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने आयोगों में नियुक्ति करके अध्यक्ष और सदस्यों की सेवा शर्तें तय की हैं। यह सब काम अगर उन्होंने सरकार में आते ही कर दिया होता तो शायद आज उनकी सरकार के सामने यह संकट नहीं आता।

कमलनाथ ने बुधवार को तीन नए जिले बनाने का ऐलान किया। इनमें एक जिला भाजपा के विधायक नारायण त्रिपाठी को खुश करने के लिए बनाया गया है। वे पिछले करीब दस महीने से कमलनाथ के संपर्क में हैं। वे अपने साथ भाजपा के एक और विधायक शरद कोल को लेकर गए थे। अगर उसी समय उनकी मांग मान कर कांग्रेस में शामिल कराया गया होता तो अब तक उनकी सीट पर उपचुनाव होकर उसके नतीजे भी आ चुके होते और अगर वे जीत जाते तो फिर कांग्रेस के दूसरे विधायक इस्तीफा देने के बारे में नहीं सोचते। भाजपा की दो सीटें कम हुई होतीं।

पर कांग्रेस नेतृत्व उनके प्रस्ताव को लेकर बैठा रहा। अब जबकि सरकार लगभग अल्पमत में आ गई है तो उनकी मांगें पूरी की जा रही है। इसी तरह अब जाकर प्रदेश के आयोग और निगमों में नियुक्ति की जा रही है। आयोग के अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री और सदस्यों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया जा रहा है। यह सब काम पहले किया जाना चाहिए थे। बिहार में एक बार लालू प्रसाद की पार्टी को बहुमत से कुछ कम सीटें आई थीं तो उन्होंने 90 से ज्यादा मंत्री बना दिए थे और कहा था कि भूतपूर्व न हो जाएं इसलिए अभूतपूर्व मंत्रिमंडल बना दिया। कमलनाथ को भी भूतपूर्व होने से बचने के लिए कुछ अभूतपूर्व करना चाहिए था।

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