मीडिया प्रभारी नियुक्त होने थे

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दिल्ली के वायु प्रदूषण से बचने के लिए गोवा चली गईं। जाने से  पहले उन्होंने तीन कमेटियां बना दीं। उन्होंने आर्थिक मामलों पर, विदेश मामलों में और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कांग्रेस अध्यक्ष को सलाह देने के लिए तीन कमेटियां बनाईं। तीनों के अध्यक्ष पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बनाए गए हैं। कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चिट्ठी लिखने वाले कई नेताओं जैसे गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा आदि को उन्होंने इसमें जगह दी। हालांकि कपिल सिब्बल को किसी कमेटी में नहीं रखा, जो पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्यादा सक्रिय हैं और सबसे ज्यादा सवाल उठा रहे हैं। परंतु सवाल है कि इन कमेटियों की क्या जरूरत थी? औपचारिक या अनौपचारिक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मनमोहन सिंह या दूसरे नेताओं से सलाह करती रहती थीं। ऐसा लग रहा है कि पार्टी में उठ रही आवाजों को शांत करने के लिए कमेटियां बना दी गई हैं।

पर जो एक कमेटी बननी चाहिए और जो एक नियुक्ति सबसे अहम है वह नहीं की गई। कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला को पार्टी का महासचिव बना दिया गया है और साथ ही कर्नाटक जैसे बड़े राज्य का प्रभार दिया गया है। पहले संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल खुद कर्नाटक के प्रभारी थे। उनकी जगह प्रभारी बने सुरजेवाला को वहां का काम संभालना है और वे साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए बनाई गई छह सदस्यों की एक अहम कमेटी के भी सदस्य हैं। फिर भी उन्हीं के पास मीडिया का प्रभार भी है।

कांग्रेस पार्टी के कई नेता मीडिया प्रभारी की अहम जिम्मेदारी के लिए जोर लगा रहे हैं। पहले माना जा रहा था कि पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को मीडिया प्रभारी बनाया जाएगा। हालांकि मामला लंबित रह गया। कांग्रेस के एक और पुराने नेता और मीडिया से जुड़े  रहे राजीव शुक्ला भी मीडिया प्रभारी के दावेदार हैं। इन दोनों के साथ साथ पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मनीष तिवारी का नाम भी चर्चा में है। पार्टी के लिए सोशल मीडिया का काम संभाल चुके दीपेंद्र हुड्डा भी संभावितों में हैं, लेकिन शायद सुरजेवाला इसके लिए राजी नहीं होंगे। बहरहाल, जिसे भी बनाना हो पर सबसे जरूरी नियुक्ति मीडिया प्रभारी की है।

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