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जी-23 के नेता अब आलाकमान के साथ

Congress's introspection by elections

congress party G-23 राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल के रात्रिभोज में कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हुए, जिसकी व्याख्या इस अंदाज में की जा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष को पिछले साल चिट्ठी भेजने वाले कांग्रेस के जी-23 समूह के नेताओं की यह बैठक थी। लेकिन असल में ऐसा नहीं था। पहले तो जी-23 से बाहर के कांग्रेस नेता भी इसमें बुलाए गए थे, जिसमें से पा चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम शामिल भी हुए। इसके अलावा भी जो जी-23 समूह है वह अब कांग्रेस आलाकमान का विरोधी नहीं है, बल्कि उसके ज्यादातर नेता आलाकमान के साथ हैं और अपना विरोध काफी पहले छोड़ चुके हैं। इनमें से कई नेताओं को अच्छी जिम्मेदारी मिल गई है और कई नेताओं को जल्दी ही नई जिम्मेदारी मिलने वाली है।

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सिब्बल की बैठक में शशि थरूर और मनीष तिवारी दोनों शामिल हुए। ये दोनों अब कांग्रेस आलाकमान के किसी फैसले का विरोध नहीं करते हैं, बल्कि हर फैसले में साथ हैं। तिवारी ने जरूर पहले कैप्टेन अमरिंदर सिंह का पक्ष लिया था लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बना दिए जाने के बाद वे उनके विरोध में कुछ नहीं बोले। इन दोनों को लोकसभा में संसदीय समूह में शामिल किया गया है और दोनों उसमें सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनके अलावा गुलाम नबी आजाद और मुकुल वासनिक को तमिलनाडु और महाराष्ट्र में खाली हुई राज्यसभा सीटों से उच्च सदन में भेजने की चर्चा है। इस जी-23 समूह के बड़े नेताओं में ले-देकर एक भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही हैं, जो अपने विकल्प तलाश रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान अगर अशोक तंवर की वापसी कराता है और रणदीप सुरजेवाला व किरण चौधरी की कमान कायम रहती है तो हुड्डा कोई दूसरा रास्ता तलाशेंगे। congress party G-23

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