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कांग्रेस पार्टी में नए नेता कहां हैं?

नागरिकता कानून के विरोध में चल रहे आंदोलनों के बीच कांग्रेस से जुड़ी दो राजनीतिक तस्वीरों ने अपने खास महत्व की वजह से ध्यान खींचा है। पहली तस्वीर असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की है, जिसमें वे वकील की ड्रेस में हैं। खुद सीनियर गोगोई और उनके सांसद बेटे गौरव गोगोई ने इस तस्वीर की खूब मार्केटिंग की, बताया कि नागरिकता कानून को चुनौती देने के लिए अरसे बाद तरुण गोगोई ने यह ड्रेस पहनी है। दूसरी तस्वीर भी तरुण गोगोई की है। रांची में झारखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर हेमंत सोरेन की शपथ में मंच पर सबसे पहले पहुंचने वाले कांग्रेस नेताओं में तरुण गोगोई अव्वल थे। पूर्व मुख्यमंत्री होने की वजह से उनको पीछे की लाइन में बैठाया गया पर जब राहुल गांधी मंच पर आए तो खुद राहुल चल कर उनके पास मिलने पहुंचे।

सोचें, 85 साल के तरुण गोगोई की इस सक्रियता का कारण क्या है और इसका मकसद क्या है? कारण यह है कि पिछले 20 साल से सोनिया और राहुल गांधी ने असम में उनका एकछत्र राज बना रखा है और उन्होंने अपने नीचे कोई नया नेता नहीं बनने दिया। मकसद यह है कि 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उनको ही चेहरा बना कर चुनाव लड़े। ध्यान रहे वे 15 साल लगातार मुख्यमंत्री रहे। उनकी वजह से कांग्रेस के दिग्गज हिमंता बिस्वा सरमा पार्टी छोड़ कर गए और आज समूचे पूर्वोत्तर में उनको भाजपा को स्थापित किया है। दूसरी ओर कांग्रेस के पास गोगोई पिता-पुत्र के अलावा कोई नेता नहीं है।

राज्य दर राज्य देखते जाएं कांग्रेस की यहीं स्थिति है। उत्तराखंड में हरीश रावत ही पार्टी का चेहरा और संगठन सब कुछ हैं। वहां पार्टी के पास कोई दूसरा नेता नहीं है। जब नेता बनाने का मौका था तब कांग्रेस ने राज बब्बर को उत्तराखंड से राज्यसभा में भेजा था। हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह और उनके बेटे के अलावा नया नेता आगे लाने के लिए कांग्रेस का संघर्ष चल रहा है। सुखविंदर सुक्खू या कुलदीप राठौड़ का विवाद खत्म नहीं हो रहा है।

झारखंड में कांग्रेस को मौका मिला तो 72 साल के रामेश्वर उरांव को और 67 साल के आलमगीर आलम को मंत्री पद की शपथ दिलाई। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के युवा आदिवासी या युवा मुस्लिम नेता नहीं जीते हैं। पर उनको कार्यकर्ता बन कर रहना है और सत्ता में बुजुर्गों को रहना है। यहीं हाल महाराष्ट्र में है वहां भी वहीं बाला साहेब थोराट, वहीं नितिन राउत और वहीं पृथ्वीराज या अशोक चव्हाण हैं। कांग्रेस ने राजस्थान में जिस तरह का संतुलन बनाया है उस तरह का संतुलन बनाने की सोच भी ज्यादा जगहों पर नहीं दिख रही है।

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