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ट्रस्ट, फाउंडेशन से पीछा छुड़ाए कांग्रेस

सोनिया और राहुल गांधी को और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी अगर सक्रिय राजनीति करनी है तो ट्रस्ट और फाउंडेशन के खेल से अलग होना होगा और कांग्रेस पार्टी को भी इससे अलग करना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी ट्रस्ट और इंदिरा गांधी ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की जांच के आदेश दिए हैं। प्रवर्तन निदेशाल, ईडी के अधिकारी की कमान में बनाई गई जांच टीम को देख कर पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि इससे गांधी-नेहरू परिवार के तीनों सक्रिय सदस्यों की परेशानी बढ़ेगी। पर इसके जवाब में कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि सरकार अपनी पवित्र गाय यानी आरएसएस को मिलने वाले चंदे की भी जांच कराएं। यह बहुत बेतुका तर्क है। आरएसएस को राजनीतिक संगठन नहीं है और भाजपा का कोई बड़ा नेता उसका पदाधिकारी है। उसके पदाधिकारी भाजपा में जरूर हैं पर भाजपा का कोई आदमी संघ में पदाधिकारी नहीं है।

पर इधर उलटी कहानी है कि यहां कांग्रेस के तीनों बड़े नेता इन तीनों ट्रस्टों या फाउंडेशनों में अहम पदों पर हैं। यह तय मानें कि जब इन ट्रस्टों, फाउंडेशनों की जांच होगी तो किश्तों में ऐसी जानकारी बाहर आएगी, जिससे कानूनी मुश्किल भले न हो पर पार्टी के लिए शर्मिंदगी बड़ी होगी। ऐसा इसलिए होगा कि इन ट्रस्टों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से चंदा मिला है, प्रधानमंत्री राहत कोष से चंदा मिला है, राज्य सरकारों, सरकारी एजेंसियों और यहां तक की कई राज्यों के जिला प्रशासन से भी चंदा मिला हुआ है। आयरलैंड की सरकार और यूरोपीय संघ ने चंदा दिया हुआ है। पुड्डुचेरी, कश्मीर और मणिपुर जैसे राज्यों के कई जिला प्रशासन की ओर से चंदा लिया गया है। सोचें, इन राज्यों की खुद की हालत कैसी है! ये सब चीजें धीरे धीरे खुलेंगी और इनसे भले कोई कानूनी परेशानी नहीं होगी पर भाजपा के नेता और आईटी सेल की ओर से इसे ऐसा स्पिन दिया जाएगा, जिसके बारे में अभी सोचा भी नहीं जा सकता है।

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