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कांग्रेस के असंतुष्टों की बड़ी तैयारी

कांग्रेस पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को पार्टी आलाकमान ने कोई तरजीह नहीं दी है। गुलाम नबी आजाद के इच्छा जताने के बावजूद उनको चुनाव प्रचार में नहीं भेजा गया। पश्चिम बंगाल के लिए स्टार प्रचारकों की दूसरी सूची में मनीष तिवारी को जरूर जगह मिली है, जो असंतुष्ट नेताओं के गुट में रहे हैं। पर उनके अलावा किसी को प्रचार के लिए नहीं पूछा गया। सो, जी-23 के बचे हुए छह-सात नेता दो मई का इंतजार कर रहे हैं। वैसे तो पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं पर कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की नजर दो राज्यों- केरल और असम पर हैं।

अगर केरल और असम में चुनाव नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं आते हैं तो पार्टी में बड़ा घमासान हो सकता है। कांग्रेस के नेता असंतुष्ट नेता खुल कर बगावत कर सकते हैं और कुछ अन्य नेता भी उनके साथ देने सामने आ सकते हैं। चुनाव वाले पांच राज्यों में से पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का कुछ भी दांव पर नहीं है। इस बार कांग्रेस आलाकमान और बागी नेताओं को भी अंदाजा है कि पार्टी कुछ खास नहीं कर पाएगी। राहुल गांधी वहां प्रचार के लिए भी नहीं जा रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस परोक्ष रूप से ममता बनर्जी को फायदा पहुंचा रही है। इसी तरह तमिलनाडु के बारे में यह आम धारणा है कि वहां डीएमके का गठबंधन जीतेगा और बाई डिफॉल्ट कांग्रेस पार्टी को सत्ता में हिस्सेदारी मिल जाएगी।

असली परीक्षा केरल और असम में हैं। इसमें पुड्डुचेरी को भी शामिल किया जा सकता है क्योंकि वहां कांग्रेस की पांच साल तक सरकार चली है। केरल फ्लिप स्टेट हैं यानी वहां पांच साल में सत्ता बदल जाती है। वहां इस बार कांग्रेस की बारी है। खुद राहुल गांधी वहां की वायनाड सीट से सांसद हैं और खूब मेहनत भी कर रहे हैं। इसी तरह असम में राहुल के करीबी जितेंद्र सिंह प्रभारी हैं और राहुल के बहुत करीबी सांसद गौरव गोगोई अघोषित चेहरा हैं। तभी राहुल और प्रियंका दोनों वहां बहुत मेहनत कर रहे हैं।

यही वजह है कि कांग्रेस के बागी नेता इन दोनों राज्यों के नतीजों पर नजर गड़ाए बैठे हैं। अगर कांग्रेस इन दोनों राज्यों में या कम से कम एक राज्य में सत्ता में नहीं आती है तो कांग्रेस में घमासान होगा। कांग्रेस के ही जानकार नेताओं का कहना है कि पार्टी में एक और विभाजन की तैयारी हो रही है। वैसे भी एक निश्चित अंतराल पर कांग्रेस पार्टी टूटती रही है। आखिरी बार बड़ी टूट जगन मोहन रेड्डी के बाहर जाने से हुई थी। उसी तरह की तैयारी इस बार असंतुष्ट नेता कर रहे हैं। अपनी कांग्रेस या सबकी कांग्रेस बनाने की तैयारी चल रही है। कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद, भूपेंदर सिंह हुड्डा जैसे नेता इसमें शामिल हैं। नतीजे खराब आए तो  हरियाणा में कांग्रेस को मौजूदा स्वरूप में एकजुट रखना मुश्किल होगा। सोनिया गांधी को हुड्डा की बात मान कर सब कुछ उनके हाथ में सौंपना होगा।

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