सिब्बल के विरोध से क्या होगा?

कांग्रेस पार्टी में परिवार के प्रति कुछ ज्यादा निष्ठा दिखाने वाले नेताओं ने पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के ऊपर हमला शुरू कर दिया है। असल में पार्टी के नेता और मशहूर वकील कपिल सिब्बल ने एक इंटरव्यू में यह सवाल उठाया है कि पता नहीं कांग्रेस पार्टी का आंतरिक चुनाव कब होगा? उनका कहना था कि एक महीने पहले पार्टी के नेता अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले थे। उस समय हालांकि सिब्बल उस मुलाकात में शामिल नहीं थे। लेकिन उनका कहना था कि मीटिंग में शामिल लोगों ने बताया कि अच्छी और खुली बात हुई थी। तब जल्दी से जल्दी संगठन चुनाव कराने पर सहमति बनी थी। इसी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि पता नहीं कब और कैसे चुनाव होंगे।

इस बयान को लेकर कांग्रेस नेता उन पर टूट पड़े हैं। ऐसा लग रहा है कि इस बयान के बहाने कांग्रेस नेता उनसे पिछला बदला निकाल रहे हैं। असल में अगस्त में सोनिया गांधी को चिट्ठी  लिखने वाले 23 नेताओं में तीन नेता सबसे ज्यादा मुखर थे। उनमें गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा के अलावा तीसरे नेता कपिल सिब्बल थे। उस समय मीडिया में खबर आई थी कि राहुल गांधी ने चिट्ठी लिखने वालों को भाजपा का आदमी बताया है। इस खबर से सिब्बल इतने नाराज हुए थे कि उन्होंने अपना ट्विटर प्रोफाइल भी बदल लिया था। तब राहुल गांधी को निजी तौर पर उनसे बात करनी पड़ी थी और सफाई देनी पड़ी थी। उस समय सिब्बल मान तो गए थे पर तेवर बागियों वाले ही रहे। बाकी नेताओं की तरह उन्होंने सौ फीसदी सरेंडर नहीं किया।

तभी ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के नेता उस घटना का बदला अब ले रहे हैं। अभी असंतुष्ट नेताओं का खेमा एक तरह से बिखर गया है। ज्यादातर नेताओं ने सफाई दे दी है। मुकुल वासनिक जैसे कुछ नेताओं को अहम जिम्मेदारी भी मिल गई है और पृथ्वीराज चव्हाण जैसे कुछ नेताओं को जिम्मेदार दी जाने वाली है। ऐसे में सिब्बल को पार्टी के अंदर से ज्यादा समर्थन नहीं मिलना है। इसलिए मौका देख कर उन पर हमला हो रहा है। पर सिब्बल को निशाना बनाने से कुछ नहीं होगा। कांग्रेस को जितनी जल्दी हो संगठन चुनाव कराना चाहिए और जितने ज्यादा पदों के लिए चुनाव हो सकते हैं, उतने पदों के लिए चुनाव कराना चाहिए। इससे पार्टी के अंदर भी नेताओं, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और विपक्ष के आरोपों का भी जवाब मिल जाएगा।

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