कांग्रेस के नए नेताओं का क्या स्टैंड?

यह हैरान करने वाली हकीकत है कि कांग्रेस पार्टी के नए नेता किसी मसले पर स्टैंड नहीं लेते हैं। वे अपनी राय जाहिर नहीं करते हैं। यह काम अभी तक पार्टी के पुराने नेताओं के ही जिम्मे है। हालांकि उन्हें भी किसी ने इसकी जिम्मेदारी नहीं दी है पर वे अपनी जिम्मेदारी समझते हैं तो जरूरी मौकों पर बयान देते हैं। जैसे अभी ‘लव जिहाद’ को लेकर बनाए जा रहे कानूनों के खिलाफ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई चीज नहीं होती है, यह भाजपा ने ईजाद किया है, जिसका मकसद देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की राज्य सरकारें जो कानून बना रही हैं वह असंवैधानिक हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश सरकार ने कानून बनाया है और उत्तर प्रदेश सरकार भी अध्यादेश लाने जा रही है।

गहलोत ने इस पर बयान दिया, लेकिन कांग्रेस के तमाम क्रांतिकारी नेता, जिनको नेतृत्व बदलने की फिक्र है, वे चुप रहे। चाहे सरकारी कंपनियों की बिक्री का मामला हो या कृषि कानूनों का मामला हो, हर बार पार्टी के पुराने नेता आगे बढ़ कर कमान संभालते दिखते हैं। कैप्टेन अमरिंदर सिंह से लेकर अशोक गहलोत, भूपेश बघेल या दिग्विजय सिंह ही इन मसलों पर बोलते हैं। पार्टी के नए नेता चुपचाप अपनी सोशलाइट एक्टिविटी में बिजी रहते हैं। वे चाहें तो ट्विटर पर आंदोलन खड़ा कर सकते हैं, लेकिन वह काम भी अकेले राहुल गांधी के जिम्मे है। असल में कांग्रेस के तमाम नए नेता किसी न किसी पृष्ठभूमि वाले हैं इसलिए उनका राजनीतिक प्रशिक्षण नहीं है। उन्होंने सीधे सत्ता देखी है। जमीनी राजनीति नहीं की। इसलिए एकाध अपवादों को छोड़ कर बाकी सब किसी गंभीर या विवादित मसले पर स्टैंड लेने से बचते हैं। उनको  लगता है कि इससे उनकी राजनीतिक संभावना खराब हो सकती है।

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