कांग्रेस पंजाब का झगड़ा संभाले

कांग्रेस पार्टी का अभी मध्य प्रदेश का झगड़ा पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। राजस्थान में भी पार्टी का अंदरूनी विवाद चरम पर है। छत्तीसगढ़ और झारखंड में पार्टी के नेता एक-दूसरे के खिलाफ तलवार खींच रहे हैं। महाराष्ट्र में पार्टी नेताओं का विवाद हाल में दिल्ली तक पहुंचा था। इस बीच पंजाब में पार्टी के अंदर बड़ी खींचतान शुरू हो गई है। पंजाब कांग्रेस के नेता किसी न किसी बहाने प्रदेश से लेकर दिल्ली तक के नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं। खबर है कि पार्टी नेताओं का एक बड़ा गुट मुख्यमंत्री के खिलाफ एकजुट हो रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह पार्टी और सरकार दोनों में मनमानी करते हैं। उन्हें रोकने की स्थिति न प्रदेश नेताओं की है और न केंद्रीय नेताओं की। यहीं वजह से है कि सारे फैसले उनकी पसंद-नापसंद से होते हैं। उनकी नापसंदगी की वजह से नवजोत सिंह सिद्धू जैसे बेहद लोकप्रिय नेता को सरकार से बाहर होना पड़ा। सिद्धू को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों का समर्थन है इसके बावजूद उनको इस्तीफा देकर सरकार से बाहर होना पड़ा और वे अभी हाशिए में पड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

इस बीच कांग्रेस के दो बड़े नेताओं और राज्यसभा सांसदों, प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दुलों ने मोर्चा खोला है। पिछले दिनों पंजाब में जहरीली शराब की बड़ी त्रासदी हुई। एक सौ से ज्यादा लोग जहरीली शराब पीने से मरे। इसमें शऱाब माफिया और पुलिस की मिलीभगत की बातें सामने आईं। प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की। उनके साथ साथ बाजवा और दुलो ने भी इस घटना की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह मांग करने के दो दिन बाद ही पंजाब सरकार ने बाजवा को मिली पुलिस सुरक्षा वापस ले ली। कहा गया कि उनको कोई खतरा नहीं है। यह कैप्टेन अमरिंदर सिंह का अपनी ताकत दिखाने का तरीका है। पर इससे कांग्रेस में नाराजगी बढ़ी है। वैसे शमशेर सिंह दुलो पार्टी के राज्यसभा सांसदों की बैठक में सोनिया गांधी की मौजूदगी में पार्टी के कामकाज पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी हो रही है और चापलूसों को आगे बढ़ाया जा रहा है। यह राहुल गांधी के करीबी नेताओं पर सीधा हमला था। बहरहाल, पंजाब में नाराज नेताओं की संख्या बढ़ रही है। सिद्धू, दुलो, बाजवा जैसे बड़े नेता नाराज हैं। कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि राज्य में सरकार को सीधे कोई चुनौती नहीं है। आम आदमी पार्टी और अकाली दल दोनों मिल कर भी बहुमत के करीब नहीं पहुंचते हैं। पर चिंता की बात यह है कि अब चुनाव में डेढ़ साल का समय रह गया है। माना जा रहा है कि पहले रिटायरमेंट की घोषणा कर चुके अमरिंदर सिंह के फिर से अगले चुनाव में नेतृत्व करने की इच्छा जताने की वजह से विवाद शुरू हुआ है।

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